चुनावी तैयारियां और प्रशासनिक प्रक्रिया बनी वजह
नरेश राजपूत ने कहा कि सरकार का यह फैसला केवल ग्राम प्रधानों को राहत देने के उद्देश्य से नहीं लिया गया है, बल्कि ग्रामीण प्रशासन और विकास कार्यों को सुचारु बनाए रखने की दृष्टि से भी यह आवश्यक था। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों का दबाव तथा अभी तक ‘एसआईआर’ (SIR) और वोटर लिस्ट से जुड़े कार्यों का अंतिम रूप से पूरा न हो पाना, इस निर्णय के पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं।
उनका कहना है कि यदि ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति नहीं की जाती, तो ग्रामीण विकास योजनाओं और स्थानीय कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका बनी रहती।
प्रधानों के लिए जिम्मेदारी निभाने का अवसर
सिजहरी ग्राम प्रधान नरेश राजपूत ने अपने साथी प्रधानों से इस अतिरिक्त अवधि को जिम्मेदारी और अवसर दोनों के रूप में देखने की अपील की। उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा मिले अतिरिक्त छह महीने हमारे लिए एक अवसर हैं। हमारी जिम्मेदारियां कम नहीं हुई हैं, बल्कि पहले से अधिक बढ़ गई हैं।”
उन्होंने कहा कि यह समय उन विकास कार्यों को पूरा करने का है जो किसी तकनीकी अथवा अन्य कारणों से अधूरे रह गए थे। उन्होंने सभी प्रधानों से गांवों के विकास में अधिक सक्रियता और तत्परता दिखाने का आग्रह किया, ताकि सरकार और जनता के भरोसे पर खरा उतरा जा सके।
अधिकारियों के सहयोग को बताया जरूरी
नरेश राजपूत ने कहा कि विकास कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि पहले की तरह आगे भी प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग मिलता रहेगा और इसी तालमेल के साथ गांवों में विकास कार्य जारी रहेंगे।
साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के इस निर्णय से ग्राम प्रधानों का मनोबल बढ़ा है। अब सभी प्रधान पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ अपने अंतिम छह माह के कार्यकाल को यादगार और परिणामदायी बनाने की दिशा में कार्य करेंगे।


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