अभिजीत दीपके अमेरिका से शनिवार को दिल्ली पहुंचे और सीधे जंतर-मंतर पहुंच गए।
प्रदर्शन का आयोजन और प्रमुख मांगें
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने NEET, NTA और CBSE परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने शिक्षा मंत्री से इस्तीफा देने और अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने का आग्रह किया।
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने छात्रों की आत्महत्याओं और खराब शिक्षा व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई। आंदोलन दोपहर 3:30 बजे समाप्त हुआ। इसके बाद अभिजीत दीपके ने सरकार को 7 दिन का समय देते हुए कहा कि अगर मंत्री को हटाया नहीं गया तो आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति दी थी। कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस के सहयोग की सराहना की और कहा कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
अभिजीत दीपके का आगमन
अभिजीत दीपके पिछले एक साल से अमेरिका में रह रहे थे। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर उनके हाथ में डॉ. भीम राव आंबेडकर की जीवनी थी। उन्होंने लोगों से फूल, तिरंगा और किताब लेकर आने की अपील की थी।
AAP से पुराना संबंध और जेन-जी की दूरी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ जुड़े रहे थे। वे अरविंद केजरीवाल की पार्टी की सोशल मीडिया और चुनाव अभियानों में काम करते थे।
कुछ युवाओं ने अलग-अलग इंटरव्यू में कहा कि जब उन्हें पार्टी का AAP से संबंध पता चला तो उन्होंने प्रदर्शन से दूरी बना ली। वे किसी भी राजनीतिक पार्टी की प्रॉक्सी के रूप में शामिल नहीं होना चाहते थे।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और चुनौतियां
यह आंदोलन सोशल मीडिया पर शुरू हुए एक महीने पुराने अभियान का नतीजा था। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पार्टी के 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी। कुछ विश्लेषकों ने इसे सोशल मीडिया की हाइप बनाम वास्तविकता, भयंकर गर्मी और आंदोलन की नईता से जोड़ा।
आंदोलन की शुरुआत 15 मई को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की बेरोजगार युवाओं के बारे में दी गई ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी के खिलाफ हुई थी। इस बयान की व्यापक आलोचना हुई थी।
विपक्षी दलों शिवसेना (UBT) और समाजवादी पार्टी ने इस आंदोलन का समर्थन किया। विश्लेषकों का मानना है कि पेपर लीक जैसे मुद्दे हर परिवार को प्रभावित करते हैं, इसलिए इसे व्यापक समर्थन मिल रहा है।

खबरें नहीं सच का प्रहार
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