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AIMPLB

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भारतीय मुसलमानों की सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है। बोर्ड का आरोप है कि समुदाय को मुख्यधारा से अलग-थलग किया जा रहा है। इस मुद्दे पर बोर्ड सोमवार को सक्रिय हुआ और जल्द ही एक विस्तृत दस्तावेज जारी करने तथा राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की।

AIMPLB के प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने बताया कि बोर्ड मुसलमानों की कथित बिगड़ती स्थिति को लेकर पूरे देश में जागरूकता फैलाने और समाधान की दिशा में प्रयास करने वाला है। बोर्ड का मानना है कि मुसलमानों को विभिन्न मोर्चों पर लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भारतीय मुसलमानों की प्रमुख शिकायतें

AIMPLB ने समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों को सात प्रमुख श्रेणियों में रेखांकित किया है:

  • मुसलमानों की जिंदगी की सुरक्षा
  • उनकी संपत्ति की सुरक्षा
  • सम्मान और गरिमा की रक्षा
  • मस्जिद, मदरसा और कब्रिस्तान से जुड़े मुद्दे
  • मौलिक अधिकारों का संरक्षण
  • आस्था और विश्वास की स्वतंत्रता

बोर्ड का कहना है कि इन क्षेत्रों में लगातार दबाव और अलगाव की भावना बढ़ रही है, खासकर बीजेपी शासित राज्यों में।

कांग्रेस-बीजेपी दोनों से निराशा

AIMPLB ने साफ किया है कि वह केवल सत्ताधारी दलों से ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों से भी असंतुष्ट है। प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने कहा, “हम कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों से नाखुश हैं। इनमें से कोई भी पार्टी मुसलमानों के मुद्दों को मजबूती से नहीं उठा रही है।”

हाल ही में राहुल गांधी के बयान का जिक्र करते हुए बोर्ड ने कहा कि मुसलमानों के मुद्दों को केवल ‘अल्पसंख्यक’ शब्द में समेटने की बजाय स्पष्ट रूप से समुदाय का नाम लेकर चर्चा की जानी चाहिए। फिर भी बोर्ड को कांग्रेस पर भरोसा नहीं है।

AIMPLB की भविष्य की रणनीति

बोर्ड ने समुदाय की चिंताओं को दूर करने के लिए बहुआयामी रणनीति तैयार की है। इसमें शामिल प्रमुख पहलू हैं:

  • संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक मुद्दों पर मुसलमानों को जागरूक करना
  • मुस्लिम हितों वाले मामलों में समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ, इस्लामिक शिक्षा और धार्मिक अधिकारों को मजबूत करने के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म के रूप में उभरना
  • धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा के प्रति समझ विकसित करना
  • समुदाय के भीतर चर्चा को बढ़ावा देकर फीडबैक इकट्ठा करना और इसे नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा व संवर्धन
  • कानूनी और शांतिपूर्ण तरीकों से आवाज उठाना तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय योगदान देना

AIMPLB का लक्ष्य है कि मुसलमानों को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त बनाया जाए और उनके मुद्दों को लोकतांत्रिक ढंग से प्रभावी ढंग से उठाया जाए।

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