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देशभर में पेट्रोल और डीजल भरवाते समय उपभोक्ता अक्सर मशीन पर दिख रहे ‘जीरो’ पर पूरा भरोसा कर लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार यह भरोसा महंगा साबित होता है। सही दाम चुकाने के बावजूद ग्राहकों को कम मात्रा में ईंधन मिलने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। असल में कुछ पेट्रोल पंप कर्मचारी ऐसी चतुर तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जो पहली नजर में नजर नहीं आतीं, लेकिन नुकसान काफी बड़ा कर देती हैं।


1. जीरो सेट करके ध्यान भटकाने की चाल

ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर कर्मचारी सबसे पहले मशीन को जीरो पर सेट करके ग्राहक को दिखाते हैं। यह भरोसा जगाने का तरीका है। लेकिन इसी दौरान कई बार जानबूझकर ध्यान भटकाया जाता है — कैश गिनने, पेमेंट ऐप खोलने या अनावश्यक बातचीत के जरिए।

जैसे ही ग्राहक का ध्यान कुछ सेकंड के लिए हटता है, मशीन में हेरफेर की संभावना बन जाती है। परिणामस्वरूप मीटर पर पूरा फ्यूल दिखने के बावजूद टंकी में कम मात्रा पहुंचती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फ्यूल भरने की पूरी प्रक्रिया शुरू से अंत तक लगातार नजर में रखें।

2. नॉजल की स्पीड से खेलने की ट्रिक

दूसरी आम चालाकी नॉजल (पाइप) की गति को नियंत्रित करने की है। शुरू में फ्यूल तेज गति से निकलता दिखाई देता है, जिससे ग्राहक को लगता है कि भराई तेजी से हो रही है। लेकिन बीच में अचानक फ्लो धीमा कर दिया जाता है।

इस तकनीक से मीटर पर जो मात्रा दर्ज होती है और असल में टंकी में पहुंचने वाली मात्रा में फर्क हो जाता है। ग्राहक को पूरा फ्यूल मिलने का भ्रम होता है, जबकि वास्तव में कुछ लीटर कम रह जाते हैं। यह तरीका खासकर व्यस्त पंपों पर ज्यादा इस्तेमाल होता है जहां ग्राहक जल्दबाजी में होते हैं।

3. मीटर कैलिब्रेशन और गैप का फायदा

कुछ पेट्रोल पंपों पर मशीन का कैलिब्रेशन सही नहीं रखा जाता। जब ग्राहक फ्यूल भरने की प्रक्रिया पर पूरा ध्यान नहीं दे पाता, तो छोटे-छोटे अंतराल में रीडिंग और वास्तविक डिलीवरी के बीच गैप पैदा कर लिया जाता है।

यह गैप हर ग्राहक के लिए थोड़ा-थोड़ा होता है, लेकिन पूरे दिन में पंप मालिक के लिए यह महत्वपूर्ण अतिरिक्त लाभ बन जाता है। ग्राहक को आमतौर पर यह अंतर महसूस नहीं होता क्योंकि हर बार थोड़ी मात्रा कम होती है।

ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानियां

  • हमेशा विश्वसनीय और प्रमाणित पेट्रोल पंप चुनें।
  • फ्यूल भरने से पहले और बाद में मशीन की रीडिंग खुद चेक करें।
  • रसीद (बिल) जरूर लें और उसमें दर्ज मात्रा व कीमत की पुष्टि करें।
  • यदि कोई संदेह हो तो तुरंत संबंधित अधिकारियों या कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराएं।

पेट्रोल पंप पर ‘जीरो’ देखकर संतुष्ट होना काफी नहीं है। सतर्कता और सही तरीके से चेकिंग ही आपकी सुरक्षा है। छोटी-सी लापरवाही लंबे समय में आपके पैसे की बर्बादी कर सकती है।



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