Breaking News

बांग्लादेश गृह मंत्री का बॉर्डर किलिंग बयान, भारत की भाषा बोलने का आरोप

Bangladesh
ढाका। बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद द्वारा 2 जून को बॉर्डर किलिंग पर दिए गए बयान ने देश में राजनीतिक और मीडिया स्तर पर व्यापक बहस छेड़ दी है। कई विशेषज्ञों ने इस बयान को भारत की आधिकारिक भाषा से मिलता-जुलता बताया है।

मंत्री ने सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बयान दिया था। इस मुद्दे को लेकर बांग्लादेश में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार ने दशकों पुराने बॉर्डर किलिंग के मुद्दे पर अपना रुख नरम कर दिया है।

गृह मंत्री का विवादास्पद बयान

2 जून को सलाहुद्दीन अहमद ने बॉर्डर किलिंग के संदर्भ में जो टिप्पणी की, उसे बांग्लादेश के कई विश्लेषकों ने भारत के पक्ष में बताया है। बयान ऐसे समय आया है जब 7 जून को बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) के अधिकारी नई दिल्ली में भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ बैठक करने वाले हैं।

विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया

बांग्लादेशी लेखक और पत्रकार जन्नतुल नईम ने डेली स्टार में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि गृह मंत्री का बयान भारत सरकार के प्रवक्ताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले तर्कों से काफी मिलता-जुलता है।

नईम ने लिखा कि जिस बात को भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैध साबित नहीं कर पाया, उसे बांग्लादेश के गृह मंत्री ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस बयान से बॉर्डर किलिंग की परिभाषा ही बदल गई है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और सवाल

जन्नतुल नईम ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि बॉर्डर किलिंग का मतलब किसी भी तरफ के नागरिकों की हत्या से है, चाहे वह जीरो लाइन के किसी भी ओर हो। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून केवल आत्मरक्षा में उचित बल के उपयोग की अनुमति देता है।

मुख्य सवाल यह उठाया गया है कि क्या सीमा सुरक्षा बलों को गिरफ्तारी के बजाय सीधे गोली चलाने का अधिकार है? विशेषज्ञों का कहना है कि गृह मंत्री के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि बांग्लादेश इस आधार को स्वीकार कर रहा है, जिसे भारत लंबे समय से अपना रहा है।

7 जून की बैठक पर असर की आशंका

विशेषज्ञों की चिंता है कि गृह मंत्री के इस बयान का प्रभाव 7 जून को दिल्ली में होने वाली BGB-BSF बैठक पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि BGB के अधिकारी बातचीत में पहले से ही दबाव महसूस कर सकते हैं।

यह बहस बांग्लादेश में बॉर्डर किलिंग को लेकर लंबे समय से चले आ रहे संवेदनशील मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दी है।

0 Comments