'परीक्षा से ज्यादा बुर्का और पहचान जरूरी'
प्रवेश न मिलने से व्यथित छात्रा कुलसुम बानो ने परीक्षा केंद्र के बाहर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट कहा कि उसके लिए परीक्षा से कहीं अधिक उसका बुर्का और उसकी धार्मिक पहचान मायने रखती है। छात्रा ब्यावर से अजमेर परीक्षा देने पहुंची थी।
छात्रा का दावा है कि सुरक्षा जांच के दौरान उससे पहले दुपट्टा और फिर बुर्का हटाने को कहा गया। कुलसुम ने बताया, "मैंने 3 मई को भी इसी पोशाक (बुर्का और दुपट्टा) में परीक्षा दी थी। जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने हमें इस परिधान में परीक्षा देने की अनुमति दी है, तो केंद्र स्तर पर हमें रोका नहीं जा सकता। यदि मुझे इन कपड़ों में प्रवेश नहीं मिला, तो मैं परीक्षा छोड़ दूंगी।"
नियमों का हवाला देकर पिता ने जताया विरोध
छात्रा के पिता मोहम्मद आलिम ने भी केंद्र प्रबंधन के इस रवैये पर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने एनटीए के नियमों का संदर्भ देते हुए कहा कि नियम 18 के तहत अभ्यर्थियों को अपने धार्मिक परिधान पहनकर परीक्षा में शामिल होने का अधिकार है।
"मेरी बेटी पिछले तीन साल से इस प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है और उसने 3 मई को भी बुर्का पहनकर ही परीक्षा दी थी। हमने केंद्र के कर्मचारियों से अनुरोध किया था कि वे किसी महिला स्टाफ सदस्य से एकांत में उसकी पूरी जांच करवा लें, लेकिन उन्होंने शुरुआत में हमारी बात मानने से इनकार कर दिया।" — मोहम्मद आलिम, छात्रा के पिता
पुलिस और प्रशासन की समझाइश से सुलझा मामला
परीक्षा केंद्र के बाहर बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। सीओ नॉर्थ शिवम जोशी ने स्थिति को संभालते हुए मामले को शांत कराया।
अधिकारी ने मीडिया को जानकारी दी कि नियमों को लेकर कुछ भ्रांतियां और उलझन की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसे उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार समय रहते स्पष्ट कर लिया गया। बुर्के से जुड़े इस गतिरोध को सुलझाने के बाद छात्रा को नियमानुसार प्रवेश दिया गया।

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