
सिंगल बेंच के फैसले को डबल बेंच ने रखा बरकरार
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में अंबिकापुर नगर निगम की ओर से दायर अपील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने सिंगल बेंच के उस पुराने आदेश को सही ठहराया, जिसमें याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया गया था। सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने टिप्पणी की कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का मूल उद्देश्य शासकीय सेवक के असामयिक निधन के बाद उसके आश्रितों को अचानक उत्पन्न हुए वित्तीय संकट से संबल प्रदान करना है। इसलिए, संबंधित अधिकारियों को इस नीति के क्रियान्वयन में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
क्या है अंबिकापुर नगर निगम का पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद अंबिकापुर नगर निगम से जुड़ा है। यहां सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत एक व्यक्ति का सेवाकाल के दौरान अचानक निधन हो गया था। मृतक कर्मचारी के बड़े परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटे और एक पुत्री शामिल थे, जो पूरी तरह उन्हीं की आय पर आश्रित थे। पिता की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र ने अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत रोजगार के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। हालांकि, नगर निगम प्रशासन ने यह तर्क देते हुए आवेदन को नामंजूर कर दिया कि आवेदक की माता पहले से ही वहां सफाई कर्मी के रूप में कार्यरत हैं।
तकनीकी नियमों की आड़ में आवेदन खारिज करना गलत
नगर निगम ने वर्ष 2013 की नीति का हवाला देते हुए दलील दी थी कि परिवार का कोई भी सदस्य शासकीय नौकरी में होने पर दूसरा सदस्य अनुकंपा का पात्र नहीं होता। इसके विपरीत, याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसकी माता का वेतन अत्यंत अल्प है, जिससे इतने बड़े परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है।
अदालत ने निगम की दलीलों को त्रुटिपूर्ण पाते हुए कहा:
अधिकारियों ने प्रभावित परिवार की जमीनी और आर्थिक परिस्थितियों को जानने का कोई प्रयास नहीं किया।
किसी सदस्य का कम वेतन वाले पद पर होना यह सिद्ध नहीं करता कि परिवार संकट से उबर चुका है।
अनुकंपा नियुक्ति यद्यपि कोई मौलिक अधिकार नहीं है, परंतु यह शासन की एक कल्याणकारी व्यवस्था है।
इस तल्ख टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने नगर निगम की अपील को खारिज करते हुए पीड़ित पक्ष को बड़ी राहत प्रदान की है।

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