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Namaz
International Yoga Day (21 जून) के विशेष अवसर पर देश की वित्तीय राजधानी मुंबई से एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। यहाँ की ऐतिहासिक मीनारा मस्जिद के बाहर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा एक सार्वजनिक योग सत्र का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के आयोजन के बाद से ही कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की नीतियों और दोहरे मानदंडों को आड़े हाथों लेते हुए तीखे राजनीतिक तंज कसे हैं। इस आयोजन ने सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर देश की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है।

सड़क पर योग बनाम सड़क पर नमाज का मुद्दा

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह मुंबई की प्रसिद्ध मीनारा मस्जिद के ठीक बाहर मुख्य सड़क पर मुस्लिम समुदाय के नागरिकों के साथ मिलकर आयोजित किया गया योग सत्र है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और रागिनी नायक ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया।

विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय का कोई व्यक्ति सार्वजनिक सड़क पर योग करता है, तो उसे सरकार द्वारा 'सराहनीय' माना जाता है; परंतु यदि वही व्यक्ति सड़क पर नमाज अदा करता है, तो प्रशासन द्वारा कानूनी कार्रवाई या 'बुलडोजर' की कार्रवाई की जाती है।

कोलकाता में भी दिखा नियमों पर दोहरा रवैया

सड़कों पर आयोजनों को लेकर इसी तरह का एक और विरोधाभास पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी देखने को मिला। यहाँ प्रधानमंत्री के योग कार्यक्रम के आयोजन हेतु प्रमुख मार्ग 'रेड रोड' को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था।

"कुछ सप्ताह पहले ईद की नमाज के समय यातायात व्यवस्था में व्यवधान का हवाला देकर इसी सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि योग कार्यक्रम के लिए नियम अचानक कैसे बदल दिए गए?" — स्थानीय मुस्लिम नेताओं का बयान

विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक पक्षों का दृष्टिकोण

इस संवेदनशील मुद्दे पर देश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में दो स्पष्ट विचारधाराएं देखने को मिल रही हैं:

  • विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का पक्ष: इनका मुख्य तर्क है कि सार्वजनिक मार्गों पर धार्मिक प्रार्थनाओं (जैसे नमाज) को प्रतिबंधित करने वाली सरकारें योग जैसे आयोजनों के लिए सड़कों को बंद करने की छूट दे रही हैं। उनका मानना है कि यातायात प्रबंधन और कानून व्यवस्था से जुड़े नियम सभी नागरिकों व आयोजनों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

  • सरकार और भाजपा समर्थकों का तर्क: सत्तापक्ष का रुख है कि योग किसी धर्म विशेष से संबंधित न होकर एक गैर-सांप्रदायिक और स्वास्थ्य वर्धक गतिविधि है, जिसका उद्देश्य समाज को जोड़ना है। उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के प्रशासनों का तर्क है कि सड़कों पर नियमित धार्मिक सभाओं से आम जनता को असुविधा होती है, इसलिए कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रतिबंध लगाए गए हैं, न कि किसी भेदभाव की भावना से।

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