Khabar Prahar Logo खबरें नहीं सच का प्रहार
>
LATEST
खबर प्रहार...
BREAKING खबर प्रहार को रिर्पोटिंग हेतु संवाददाता की आवश्यकता है। संपर्क करें........

Stay Connected Worldwide

Uncover the Truth

Post Page Advertisement [Top]

Advertisement

 MP/ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गुनगा थाना क्षेत्र से ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला को इंटरनेट पर पुराना नोट बेचकर रातों-रात लखपति बनने का सपना देखना बेहद भारी पड़ गया। ट्रैक्टर छपे 5 रुपये के पुराने नोट को 23 लाख रुपये में बेचने के लालच में आकर पीड़ित महिला ने ₹1,91,000 की मोटी रकम गंवा दी। शिकायत दर्ज होने के बाद गुनगा थाना पुलिस ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुआ जालसाजी का खेल

पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गुनगा के कलारा गांव की रहने वाली 36 वर्षीय अंतिम विश्वकर्मा पिछले दिनों अपनी बेटी स्वाति के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो देख रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर एक ऐसे वीडियो पर पड़ी, जिसमें ट्रैक्टर की तस्वीर वाले पुराने पांच रुपये के नोट के बदले लाखों रुपये देने का बड़ा दावा किया जा रहा था। वीडियो में दिए गए संपर्क नंबर पर जब महिला ने कॉल किया, तो ठगों ने उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए नोट की फोटो, आधार कार्ड और एक सेल्फी वॉट्सएप पर भेजने को कहा।

23 लाख रुपये का मूल्यांकन और फर्जी दस्तावेज

पीड़ित मां-बेटी ने जैसे ही मांगी गई जानकारियां वॉट्सएप पर साझा कीं, ठगों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए उनके नोट की कीमत ₹23 लाख आंकी। महिला का भरोसा जीतने के लिए शुरुआती प्रक्रिया के नाम पर महज 620 रुपये जमा करवाए गए। इसके तुरंत बाद शातिर अपराधियों ने मुंबई की एक कथित नामी कंपनी के फर्जी दस्तावेज और रसीदें महिला को भेजीं, जिससे महिला को यह यकीन हो गया कि उनकी रकम का भुगतान प्रक्रिया में है।

टैक्स और क्लीयरेंस के नाम पर ऐंठे लाखों रुपये

एक बार विश्वास कायम होने के बाद ठगों ने महिला से अलग-अलग बहानों से पैसे ऐंठना शुरू कर दिया। शातिरों ने फाइल चार्ज, जीएसटी (GST), इनकम टैक्स क्लीयरेंस और डाटा एंट्री फीस जैसे कई तकनीकी शुल्कों का हवाला देकर बार-बार पैसों की मांग की। झांसे में आकर महिला ने विभिन्न डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1,91,000 रुपये आरोपियों द्वारा दिए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए।

ठगी का अहसास और पुलिसिया कार्रवाई: इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी जब आरोपियों की तरफ से रुपयों की मांग बंद नहीं हुई, तब जाकर पीड़िता को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए साइबर अपराधियों ने कई फर्जी मोबाइल नंबरों और अलग-अलग यूपीआई (UPI) खातों का इस्तेमाल किया है, जिनकी तकनीकी रूप से ट्रैकिंग की जा रही है।

No comments:

Post a Comment

Bottom Ad [Post Page]

Advertisement