हालांकि, मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत गांव में भारी संख्या में जवान तैनात कर दिए। बाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई, जिसमें समझौता हो गया। निकाले गए परिवार अपने घरों में लौट आए हैं, लेकिन शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल अभी भी मौजूद है।
परिवारों का आरोप
संत राम दुग्गा, चैतू कुमेटी, मनायकु वट्टी समेत प्रभावित लोगों ने बताया कि वे कई वर्षों से इसी गांव में रह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब उनके धार्मिक विश्वास के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और सामाजिक बहिष्कार का शिकार बनाया जा रहा है।
गांव वालों का अल्टीमेटम
इस विवाद के बाद गांव वालों ने ईसाई परिवारों को एक माह के अंदर अपने मूल धर्म में लौट आने का अल्टीमेटम दिया था। यदि यह शर्त पूरी नहीं हुई तो उन्हें गांव से बाहर करने की चेतावनी दी गई थी।
दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा के बाद फिलहाल समझौता हो गया है और प्रभावित परिवार वापस अपने घरों में लौट चुके हैं।
पुलिस की सतर्कता
नारायणपुर पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे गांव को सुरक्षा छावनी में तब्दील कर दिया है। किसी भी अप्रिय घटना या दोनों पक्षों के बीच संभावित टकराव को रोकने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
वर्तमान में गांव में शांति बनी हुई है, लेकिन प्रशासन पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। स्थानीय स्तर पर धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।

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