जनसुनवाई में एक दांपत्य विवाद के मामले में आयोग ने पति-पत्नी के संबंधों में सुधार लाने के उद्देश्य से अनावेदक चिकित्सक को नियमित रूप से सखी वन स्टॉप सेंटर में उपस्थित होने के निर्देश दिए। साथ ही पति को अपनी पत्नी को प्रतिमाह 20 हजार रुपये भरण-पोषण राशि देने तथा पारिवारिक सामंजस्य बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रयास करने को कहा गया। इस प्रकरण की आगामी एक वर्ष तक सखी वन स्टॉप सेंटर, अंबिकापुर द्वारा नियमित निगरानी की जाएगी।
पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े एक मामले में आयोग ने दोनों पक्षों को तहसील कार्यालय बतौली में खाता पृथक्करण हेतु आवेदन प्रस्तुत करने की सलाह दी। वहीं पारिवारिक विवाद के एक अन्य प्रकरण में पक्षकारों को आपसी सहमति से समझौता करने अथवा न्यायालय की शरण लेने की सलाह देते हुए मामले का निराकरण किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि न्यायालय में विचाराधीन मामलों में वह हस्तक्षेप नहीं करेगा और संबंधित पक्ष विधिक प्रक्रिया अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं।
लंबे समय से लापता एक महिला से संबंधित मामले में आयोग ने संरक्षण अधिकारी के माध्यम से बलरामपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं निजी शिक्षण संस्था से एक महिला कर्मचारी की एकतरफा सेवा समाप्ति की शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी, अंबिकापुर को जांच कर संबंधित महिला को एक वर्ष के वेतन के समतुल्य राहत दिलाने तथा दो माह के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
बीमा दावा लंबित रहने के एक मामले में आयोग ने संबंधित बैंक एवं बीमा कंपनी को एक माह के भीतर प्रकरण का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही संरक्षण अधिकारी को इसकी निगरानी करने को कहा गया।
सुनवाई के दौरान कृषि विभाग से जुड़े एक गंभीर मामले में महिला कर्मचारियों ने प्रभारी एसएडीओ श्री विनायक पाण्डेय पर कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार, अभद्र आचरण और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने उनके तत्काल निलंबन की अनुशंसा की है। साथ ही उपसंचालक कृषि, अंबिकापुर को विभागीय जांच कर दो वेतनवृद्धियां रोकने संबंधी कार्रवाई करने तथा दो माह के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस अवसर पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि महिलाओं को त्वरित न्याय एवं राहत उपलब्ध कराना आयोग की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं का संवेदनशीलता, निष्पक्षता और तत्परता के साथ निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

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