प्रशासन की टीम ने जांच में पाया कि अवैध निर्माण और गंदे पानी की निकासी के कारण दीवार गिरने का खतरा बढ़ गया था।
घटना और प्रशासनिक कार्रवाई
18 जून को हुई इस दुर्घटना के बाद कंपनी के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हुईं। 20 जून को तहसीलदार सहित प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और पूरी जांच की। जांच में शिकायतें सही पाई गईं।
इसके बाद अवैध रूप से बनाई गई बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया गया। प्रशासन ने साफ किया कि अतिक्रमण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अवैध निर्माण के आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार, शंकर लाल अग्रवाल ने सरकारी सड़क की जमीन पर लगभग 2 फीट चौड़ी कंक्रीट नाली बना रखी थी। इस नाली के जरिए गंदा पानी छोड़ा जा रहा था, जिससे आसपास की दीवार कमजोर हो गई।
पास में चल रहे क्रेशर प्लांट में स्लैग और अन्य सामग्री का भंडारण भी किया गया था। इन गतिविधियों के कारण दीवार गिरने का खतरा बना हुआ था।
निजी जमीन पर भी अतिक्रमण
जांच में यह भी सामने आया कि शंकर लाल अग्रवाल ने ममता जायसवाल की निजी जमीन पर भी अहाता (घेराव) बना लिया था।
तहसीलदार और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध बाउंड्रीवाल को पूरी तरह हटा दिया गया। स्थानीय प्रशासन ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
सुरक्षा और अतिक्रमण पर सख्ती
यह कार्रवाई रायगढ़ जिले में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है। ऐसे मामलों में कंपनियों और व्यक्तियों पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।

खबरें नहीं सच का प्रहार
0 Comments