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पाकिस्तान में सिंधु जल समझौते पर भारत की रोक के बाद सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी के लिए मचा हाहाकार ,पाकिस्तान की एक तिहाई आबादी पर असर

Sindhu
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सिंधु जल समझौते पर भारत की रोक के एक साल बाद सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। इस फैसले से कृषि क्षेत्र प्रभावित होकर आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ गया है।

पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची समेत सिंध के कई इलाकों में पानी की सप्लाई लगातार घट रही है। जल विशेषज्ञों और किसानों में चिंता बढ़ गई है।

सिंध-बलूचिस्तान में गहराता संकट

भारत द्वारा सिंधु जल समझौते पर रोक लगाए जाने के बाद पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन दोनों प्रांतों में पानी की कमी से खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।

पाकिस्तान की लगभग एक तिहाई आबादी इस संकट से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह समस्या कम होने वाली नहीं है क्योंकि भारत अपना रुख नहीं बदला है।

राजनाथ सिंह का सख्त बयान

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि सिंधु का पानी आतंकवादियों के संरक्षकों तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने कहा था कि “खून और पानी साथ नहीं बह सकते।”

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि जिनकी आंखों के आंसू सूख चुके हैं, उन्हें पानी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। भारत सिंधु का पानी मानवता के दुश्मनों तक पहुंचने नहीं देगा।

सिंचाई नेटवर्क पर पड़ा भारी असर

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध के सिंचाई नेटवर्क पर भारी दबाव है। सिंधु नदी पर स्थित सुक्कुर बैराज से लाखों एकड़ कृषि भूमि को पानी पहुंचता है। इस बैराज के आसपास पानी की कमी तेजी से बढ़ रही है।

मुख्य नहरों में पानी की कमी:

  • उत्तर पश्चिमी नहर: 64.1 प्रतिशत
  • राइस कैनाल: 38 प्रतिशत
  • दादू कैनाल: 82 प्रतिशत

ये आंकड़े सिंध के सिंचाई विभाग के अनुसार हैं और स्थिति को गंभीर बताते हैं।

प्रांतों के बीच पानी बंटवारे का विवाद

पानी की कमी के साथ ही पाकिस्तान के अंदर प्रांतों के बीच बंटवारे को लेकर विवाद भी बढ़ गया है। सिंध प्रांत ने पंजाब पर अपने हिस्से से ज्यादा पानी लेने का आरोप लगाया है।

सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब को तय 44,000 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन वह 53,394 क्यूसेक पानी निकाल रहा है। यह उसके हक से 21 प्रतिशत ज्यादा है।

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