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न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर संबंधी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट अंग है और किसी तीसरे देश को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।

इस दौरान उन्होंने 2027-28 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच नवनिर्वाचित गैर-स्थायी सदस्यों—ऑस्ट्रिया, किर्गिस्तान, पुर्तगाल, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा जिम्बाब्वे—को बधाई भी दी।

पाकिस्तान को सख्त संदेश

पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप करते हुए जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया है। उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह अपने विभाजनकारी राजनीतिक हितों के लिए संयुक्त राष्ट्र के मंचों का बार-बार दुरुपयोग कर रहा है।

भारतीय राजनयिक ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद का सदस्य होना जिम्मेदारी है, न कि गुमराह करने वाली सूचनाएं फैलाने का मंच। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे रवैये से अंतरराष्ट्रीय मंचों की गरिमा प्रभावित होती है।

जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा

पर्वथनेनी हरीश ने साफ शब्दों में कहा, “जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।” उन्होंने पाकिस्तान के दावों को बेबुनियाद और ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत बताया।

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की खोखली बयानबाजी से इस बुनियादी सच्चाई में कोई बदलाव नहीं आ सकता।

सुरक्षा परिषद सुधार की मांग

भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि मौजूदा ढांचा 1945 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाता है, जो आज की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं है।

उन्होंने कहा कि 1960 के दशक में हुए सीमित सुधार में केवल गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई थी, लेकिन स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार किए बिना सुरक्षा परिषद प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकती। भारत भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सार्थक और वास्तविक सुधार चाहता है।

रिपोर्ट पर सुझाव

भारतीय प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट को और अधिक विश्लेषणात्मक बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट केवल तथ्यों का संकलन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में परिषद की कमियों और सुधार के क्षेत्रों को भी प्रमुखता से शामिल करनी चाहिए।

यह भाषण भारत की स्पष्ट राजनयिक स्थिति को दोहराता है, जिसमें पड़ोसी देश द्वारा लगातार उठाए जा रहे बेबुनियाद दावों को मजबूती से खारिज किया गया है।

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