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ईरान अब उन AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है जिन पर अमेरिका को सबसे ज्यादा भरोसा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हैकर्स ChatGPT और Gemini जैसे लोकप्रिय अमेरिकी AI प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके इजरायल और अमेरिका के खिलाफ साइबर अभियान चला रहे हैं। जो देश AI की दौड़ में दुनिया का नेतृत्व करने का दावा करता है, उसी की टेक्नोलॉजी अब उसके खिलाफ इस्तेमाल हो रही है।

नकली पहचान और फिशिंग का जाल

ईरानी साइबर हमलावर AI की मदद से अत्यंत यथार्थवादी फेक प्रोफाइल्स तैयार कर रहे हैं। ये प्रोफाइल्स टारगेट व्यक्ति से चैट शुरू करते हैं, उसका भरोसा जीतते हैं और फिर मालवेयर से संक्रमित लिंक्स भेजते हैं।

इजरायल में हाल ही में ऐसे कई फेक ईमेल और मैसेज सामने आए हैं जो लोगों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी दावा किया है कि उसे प्रतिदिन लगभग 5 लाख साइबर हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें कई मामलों में AI टूल्स का इस्तेमाल किया गया है।

टेक कंपनियों की चुनौती

गूगल और OpenAI जैसी कंपनियां इन गतिविधियों से वाकिफ हैं। कुछ समय पहले गूगल ने पाया कि ईरान का सरकारी हैकर ग्रुप APT42 उसके Gemini AI का इस्तेमाल करके अमेरिकी F-35 फाइटर जेट्स से संबंधित रिसर्च हासिल कर रहा था।

टेक कंपनियां संदिग्ध अकाउंट्स को नियमित रूप से ब्लॉक कर रही हैं, लेकिन ईरानी हैकर्स नए अकाउंट्स बनाकर लगातार अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।

साइबर से आगे: युद्धक्षेत्र में AI का इस्तेमाल

ईरान AI का उपयोग केवल साइबर हमलों तक ही सीमित नहीं रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह AI को युद्ध के मैदान में तेज फैसले लेने, ड्रोन नेविगेशन, पनडुब्बी टारगेटिंग और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से बचाव के लिए भी इस्तेमाल कर रहा है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि उनकी कुछ क्रूज मिसाइलों में AI-असिस्टेड गाइडेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से बचने की उन्नत तकनीक लगाई गई है। इसके अलावा ईरान AI ट्रांसलेशन टूल्स की मदद से पश्चिमी देशों की सैन्य रिपोर्ट्स और रिसर्च को तेजी से अपनी भाषा में अनुवाद करके अध्ययन कर रहा है।

बढ़ती चुनौती

यह स्थिति दिखाती है कि AI टेक्नोलॉजी अब दोधारी तलवार बन चुकी है। जो टूल्स शांति और प्रगति के लिए बनाए गए थे, वे अब वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। ईरान जैसे देश पश्चिमी AI टूल्स को हथियार के रूप में इस्तेमाल करके शक्तिशाली देशों को चुनौती दे रहे हैं।

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