
ये बदलाव छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का अवसर देने के उद्देश्य से किए गए हैं।
75 प्रतिशत उपस्थिति अब अनिवार्य
CGBSE के नए नियमों के अनुसार, नियमित छात्र का दर्जा बनाए रखने के लिए कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी होगी। यदि कोई छात्र इस मानदंड को पूरा नहीं करता है, तो उसे नियमित परीक्षार्थी नहीं माना जाएगा और बोर्ड परीक्षा में नियमित रूप से बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी।
हालांकि, बोर्ड विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 10 प्रतिशत की छूट दे सकता है। इसके लिए छात्र को वैध कारण और संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे।
APAAR ID के बिना प्रवेश प्रक्रिया अधूरी
कक्षा 9वीं से 12वीं में प्रवेश लेने वाले सभी छात्रों के लिए APAAR ID अब अनिवार्य कर दी गई है। बोर्ड ने साफ किया है कि बिना APAAR ID वाले छात्रों का एडमिशन नहीं होगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ जगहों पर विद्यार्थियों के आधार कार्ड ही नहीं बने है तो कुछ जगहो पर आधार कार्ड अपडेट नहीं हैं। आधार कार्ड ना बने होने की स्थिति में या आधार कार्ड अपडेट ना होने पर भी अपार आई.डी. जेनरेट नही हो पाएंगे। एैसे में केवल शिक्षकों के भरोसे पर ही ना रहकर पालकों और जनभागीदारी के सहयोग की भी आवश्यकता होगी क्योंकि आधार कार्ड के बिना तो अपार आई.डी भी जेनरेट नहीं होंगे।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य छात्रों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और पूरे प्रवेश व परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी व सुव्यवस्थित बनाना है।
एक सत्र में दो बार होंगी बोर्ड परीक्षाएं
परीक्षा प्रणाली में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब एक शैक्षणिक सत्र में दो मुख्य बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
- पहली परीक्षा: फरवरी-मार्च 2027
- दूसरी परीक्षा: जून-जुलाई 2027
इस नई व्यवस्था से छात्रों को अपनी पढ़ाई में सुधार करने का अतिरिक्त मौका मिलेगा। उन्हें अगले पूरे साल इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
प्राइवेट कैंडिडेट बनने के नियम
यदि कोई छात्र 75 प्रतिशत उपस्थिति का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता है, तो उसका नियमित प्रवेश रद्द हो सकता है। ऐसे छात्र केवल प्राइवेट उम्मीदवार के रूप में ही परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इससे कक्षाओं में नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और छात्र पढ़ाई के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगे।
गैप ईयर वाले छात्रों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश
पढ़ाई में अंतराल ले चुके छात्रों के लिए भी नए नियम बनाए गए हैं:
- एक वर्ष का गैप: छात्र शपथ-पत्र (Affidavit) जमा करके नियमित प्रवेश ले सकता है।
- दो वर्ष से अधिक गैप: ऐसे छात्र नियमित प्रवेश नहीं ले सकेंगे और केवल प्राइवेट उम्मीदवार के रूप में परीक्षा दे सकेंगे।
ये प्रावधान नियमित शिक्षा प्रणाली में निरंतरता बनाए रखने के लिए लागू किए गए हैं।
दूसरी परीक्षा पास करने वालों को राहत
जो छात्र जून-जुलाई 2027 में आयोजित दूसरी परीक्षा में सफल हो जाते हैं, उन्हें परिणाम घोषित होने के 10 दिनों के अंदर अगली कक्षा में प्रवेश लेने का मौका मिलेगा। यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगी जो पहली परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे।

खबरें नहीं सच का प्रहार
0 Comments