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अमेरिकी संसद में विधेयक पेश कर ग्रीन कार्ड की व्यवस्था बंद करने का दिया गया प्रस्ताव , क्या होगा भारतीयों पर असर

Green card
वाशिंगटन। अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद चिप रॉय ने H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलाव लाने वाला विधेयक संसद में पेश किया है। टेक्सास से सांसद चिप रॉय द्वारा पेश किए गए ‘अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट’ में H-1B वीजा को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) का माध्यम बनने से रोकने का प्रावधान है।

विधेयक में विदेशी छात्रों को पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति देने वाले ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम को भी समाप्त करने की मांग की गई है।


चिप रॉय का तर्क

चिप रॉय ने कहा कि पिछले 40 वर्षों में H-1B वीजा का दुरुपयोग हुआ है। नियोक्ताओं ने इससे अमेरिकी स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्र के कर्मचारियों को दरकिनार कर सस्ते विदेशी कामगारों को तरजीह दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां छंटनी और कम वेतन को कर्मचारियों की कमी बताकर छिपाती रही हैं।

सांसद का कहना है कि अब लॉटरी व्यवस्था खत्म कर नई प्रणाली लाई जाए, जिसमें योग्यता, उचित वेतन और अमेरिकी व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों को प्राथमिकता मिले।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

विधेयक के अनुसार, H-1B आवेदकों को यह साबित करना होगा कि उनका स्थायी निवास अमेरिका के बाहर है और वे वापस लौटने का इरादा रखते हैं। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया लंबित होने पर H-1B अवधि बढ़ाने की मौजूदा सुविधा भी समाप्त कर दी जाएगी।

प्रस्तावित कानून में H-1B वीजा की अधिकतम अवधि 6 साल से घटाकर 2 साल करने और लॉटरी की जगह ज्यादा वेतन वाली नौकरियों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।

एरिजोना से रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन इस विधेयक के सह-प्रायोजक हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून कॉरपोरेट हितों के बजाय अमेरिकी भविष्य की पीढ़ियों की रक्षा करेगा।

ट्रंप प्रशासन के संदर्भ में विधेयक

यह विधेयक ऐसे समय में लाया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन कानूनी प्रवासन नियमों को सख्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसमें H-1B में ऊंचे वेतन को प्राथमिकता और नए आवेदनों पर एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने जैसे कदम शामिल हैं।

चिप रॉय ने घोषणा की है कि वे कांग्रेस से रिटायर हो रहे हैं और टेक्सास के अटॉर्नी जनरल पद के लिए चुनाव लड़ेंगे।

H-1B वीजा कार्यक्रम क्या है?

H-1B अमेरिका का विशेष वीजा है, जिसके माध्यम से कंपनियां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के उच्च कुशल पेशेवरों को काम पर रखती हैं। यह मुख्य रूप से आईटी और टेक क्षेत्र में इस्तेमाल होता है। इसकी मांग अधिक होने के कारण हर साल लॉटरी के जरिए वीजा दिए जाते हैं।

विधेयक के प्रमुख बदलाव

  • ग्रीन कार्ड: H-1B को स्थायी बसने का रास्ता बनाने पर रोक।
  • अवधि: अधिकतम 6 साल की जगह केवल 2 साल।
  • एक्सटेंशन: ग्रीन कार्ड लंबित होने पर बढ़ोतरी की सुविधा खत्म।
  • नॉन-इमिग्रेंट इंटेंट: आवेदक को अमेरिका लौटने का इरादा साबित करना होगा।
  • लॉटरी: चिट्ठी व्यवस्था समाप्त कर ऊंचे वेतन वाले आवेदनों को प्राथमिकता।

यदि यह विधेयक कानून बन जाता है तो विदेशी टेक प्रोफेशनल्स, खासकर उच्च कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करना और रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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