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छत्तीसगढ़ में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की हड़ताल से राजस्व कार्य प्रभावित, रोज 1.36 लाख से अधिक मामले हो रहे हैं लंबित ,कई सरकारी योजनाएं भी ठप

 

Strike

छत्तीसगढ़ में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की जारी कलमबंद हड़ताल का असर अब प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों की सेवाओं पर व्यापक रूप से दिखाई देने लगा है। प्रदेशभर के राजस्व कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने से सरकार की कई प्रमुख योजनाओं के साथ नागरिकों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य रुक गए हैं। हड़ताल के कारण नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, प्रमाण पत्र निर्माण और डिजिटल सर्वेक्षण जैसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राजस्व सेवाएं और सुशासन शिविर हुए प्रभावित

प्रदेश में सुशासन से जुड़े विभिन्न शिविरों का संचालन भी इस हड़ताल से प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले शिविरों में शिकायतों और आवेदनों का निराकरण नहीं हो पा रहा है।

इसके अलावा निम्नलिखित सेवाएं भी प्रभावित हैं:

  • भूमि नामांतरण (म्यूटेशन)
  • सीमांकन और बंटवारा
  • जाति प्रमाण पत्र
  • निवास प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • सरकारी रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार
  • भूमि पंजीयन से संबंधित प्रक्रियाएं

स्कूल और कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के मद्देनजर विद्यार्थियों को आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

हर दिन बढ़ रही लंबित मामलों की संख्या

जानकारी के अनुसार, प्रदेश के तहसील कार्यालयों में सामान्यतः प्रतिदिन औसतन 300 मामलों का निपटारा किया जाता है। वर्तमान में प्रदेश के कुल 456 तहसीलदार और नायब तहसीलदार कार्य से विरत हैं।

इस आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि हड़ताल के चलते प्रतिदिन 1 लाख 36 हजार से अधिक सरकारी और अर्ध न्यायिक मामले लंबित सूची में जुड़ रहे हैं। यदि स्थिति एक सप्ताह तक बनी रहती है, तो लंबित मामलों की संख्या 9 लाख से अधिक पहुंच सकती है।

एग्रीस्टेक परियोजना भी प्रभावित

राजस्व विभाग से जुड़े कार्यों के ठप होने का असर केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी डिजिटल क्रॉप सर्वे परियोजना "एग्रीस्टेक" पर भी पड़ा है। भूमि और फसल संबंधी डेटा संग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित होने से परियोजना की प्रगति धीमी पड़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कार्य बाधित रहने से प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

अन्य राजस्व संगठनों ने भी दी आंदोलन की चेतावनी

इस आंदोलन को लेकर छत्तीसगढ़ पटवारी संघ, राजस्व निरीक्षक संघ, राजस्व लिपिक संघ तथा राज्य प्रशासनिक सेवा संघ (डिप्टी कलेक्टर संवर्ग) ने भी समर्थन का संकेत दिया है।

कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रांताध्यक्ष ने कहा है कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर रिकॉर्डेड साक्ष्यों में शामिल मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो पटवारियों सहित राजस्व विभाग का व्यापक अमला भी सामूहिक हड़ताल पर जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के बीच हुए विवाद के बाद प्रदेशभर के 456 तहसीलदार और नायब तहसीलदार हड़ताल पर चले गए हैं। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रांताध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे ने मामले में पुलिस कार्रवाई की गति पर सवाल उठाते हुए शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। संघ का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी होने पर हड़ताल समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है।

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