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ऑपरेशन सिंदूर की तल्खी बरकरार, पाकिस्तान ने भारतीय विमानों पर एयरस्पेस रोक बढ़ाई

 नई दिल्ली। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस में लगाए गए प्रतिबंध को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब यह प्रतिबंध 24 जुलाई 2026 तक लागू रहेगा। पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी ने 17 जून 2026 को जारी नोटिस में यह जानकारी दी। यह फैसला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले के बाद लगाए गए प्रतिबंध का विस्तार है।

प्रतिबंध की पृष्ठभूमि

पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने अप्रैल 2025 में भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों पर समान प्रतिबंध लगा रखे हैं।

पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी के नोटिस के अनुसार, भारतीय सैन्य और असैन्य विमानों पर प्रतिबंध 16 जून शाम 5:50 बजे से 24 जुलाई सुबह 4:59 बजे तक प्रभावी रहेगा। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव में कमी आई है, लेकिन कूटनीतिक संबंध अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

भारतीय एयरलाइंस पर असर

एयरस्पेस के लंबे समय तक बंद रहने से भारतीय एयरलाइन कंपनियों को परिचालन लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। कई कंपनियों को मध्य एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और उत्तरी अमेरिका के लिए लंबे मार्ग अपनाने पड़े हैं, जिससे ईंधन खपत और यात्रा समय दोनों बढ़ गए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर पर CDS का बयान

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान पिछले सभी संघर्षों से अलग है और अभी भी जारी है।

जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर देश का पहला मल्टी-डोमेन ऑपरेशन था। इसमें थल, जल और वायु — तीनों क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की गई। यह ज्यादातर नॉन-कॉन्टैक्ट युद्ध था, जबकि पहले के अधिकांश संघर्षों में सीधा संपर्क होता था।

अभियान की खासियतें

सीडीएस ने बताया कि इस ऑपरेशन में साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का भी प्रभावी उपयोग किया गया। 88 घंटे तक चले इस अभियान में तीनों सेनाओं के अलावा सरकार के अन्य विभागों और विभिन्न एजेंसियों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला।

जनरल अनिल चौहान ने आधुनिक युद्ध की नई परिभाषा देते हुए कहा कि पहले जीत को कब्जाए गए क्षेत्र, युद्धबंदियों या नष्ट किए गए सामान से मापा जाता था। लेकिन अब 300-400 किलोमीटर दूर से सटीक हमले किए जा सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर इस नई वास्तविकता का उदाहरण है।

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