यह कदम पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने और ठगी गई राशि की रिकवरी की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
E-Zero FIR प्रणाली कैसे काम करेगी?
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ₹10 लाख या उससे अधिक की साइबर ठगी का शिकार होता है तो वह 1930 हेल्पलाइन नंबर या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करा सकता है।
शिकायत दर्ज होते ही सिस्टम स्वतः डिजिटल FIR जनरेट कर लेगा। इसकी प्रमाणित कॉपी शिकायतकर्ता को तुरंत ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से भेज दी जाएगी। साथ ही संबंधित बैंक और पुलिस को तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा, जिससे ठगी गई राशि को फ्रीज किया जा सके।
सत्यापन की प्रक्रिया
शिकायतकर्ता को FIR दर्ज होने के तीन दिनों के अंदर संबंधित साइबर थाने में जाकर आवश्यक दस्तावेज और बयान का सत्यापन कराना होगा। इस प्रक्रिया के बाद FIR को पूरी तरह वैध माना जाएगा।
यह व्यवस्था पारंपरिक FIR प्रक्रिया की तुलना में काफी तेज और पारदर्शी होगी, जिससे पीड़ितों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
साइबर अपराधियों पर लगाम
E-Zero FIR प्रणाली साइबर अपराधों में तेजी से कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस व्यवस्था से ठगी की राशि को तुरंत फ्रीज करने में मदद मिलेगी, जिससे अपराधियों द्वारा पैसा निकालने की संभावना काफी कम हो जाएगी।
यह प्रणाली विशेष रूप से ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड, फिशिंग, UPI ठगी और अन्य डिजिटल अपराधों के मामलों में प्रभावी साबित होने की उम्मीद है।
सरकार का फोकस
केंद्र सरकार साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और आम नागरिकों को डिजिटल लेन-देन के दौरान सुरक्षा प्रदान करने पर लगातार जोर दे रही है। E-Zero FIR इसी दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
इस प्रणाली के लागू होने के बाद साइबर ठगी के शिकार लोगों को तुरंत कानूनी सहायता और वित्तीय सुरक्षा मिल सकेगी।

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