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छत्तीसगढ़ में बिजली के दामों में बढ़ोतरी के फैसले के विरोध में कांग्रेस ,करेगी प्रदेशव्यापी आंदोलन

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली के दामों में बढ़ोतरी के फैसले के विरोध में कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के इस कदम से जनता पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। उन्होंने बिजली दरों में वृद्धि और स्मार्ट मीटर लगाए जाने का पुरजोर विरोध करते हुए प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।

कांग्रेस का आंदोलन कार्यक्रम

दीपक बैज ने बताया कि 17 जून को प्रदेश के सभी जिलों में बिजली विभाग के दफ्तरों का घेराव किया जाएगा। इस दौरान बिजली मंत्री का पुतला भी दहन किया जाएगा।

18 जून को सभी जिलों में पत्रकार वार्ता आयोजित कर बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी का विरोध दर्ज कराया जाएगा। जुलाई के पहले सप्ताह में कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर हटाने के लिए आवेदन भरवाएंगे।

बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी हुई

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली दामों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की है। गैर-घरेलू श्रेणी में 20 से 40 पैसे और कृषि पंपों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाए गए हैं।

यह भाजपा सरकार के कार्यकाल में पांचवीं बार बिजली दरों में बढ़ोतरी है। बैज ने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद अब तक बिजली के दाम कुल 31.23 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। इसके पहले हाल ही में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (MPPS) भी बढ़ाया गया था।

कांग्रेस सरकार का रिकॉर्ड गिनाया

दीपक बैज ने तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार के पांच साल के कार्यकाल में बिजली के दामों में सिर्फ 2 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई थी। उस समय 400 यूनिट तक बिजली बिल आधा करने की योजना भी लागू थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार 400 यूनिट बिल आधा योजना बंद करने के बाद लगातार बिजली दरें बढ़ा रही है। नतीजतन उपभोक्ताओं को तीन-चार गुना बिल आ रहे हैं। जून महीने में 45 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं के बिल औसत से तीन गुना अधिक आए हैं।

सरकार पर तीखा हमला

दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार जनता पर बोझ डालने का काम कर रही है। बिजली विभाग उपभोक्ताओं को बिल के नाम पर लूट रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संभाल नहीं पा रही है और केवल जनता की जेब पर डाका डालने में लगी है।

कांग्रेस का मानना है कि बिजली दरों में वृद्धि के बजाय उपभोक्ताओं को राहत दी जानी चाहिए। पार्टी स्मार्ट मीटर लगाए जाने का भी विरोध कर रही है और इसे वापस लेने की मांग करेगी।

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