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अमेरिका और ईरान ने लंबे समय से चले आ रहे तनाव को समाप्त करने के लिए शांति समझौते पर सहमति जताई ,9 जून को जेनेवा में हो सकतें है हस्ताक्षर

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वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान ने रविवार को लंबे समय से चले आ रहे तनाव को समाप्त करने के लिए शांति समझौते पर सहमति जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है। ईरान ने भी बयान जारी कर कई महीनों की बातचीत के बाद MoU को अंतिम रूप दिए जाने की पुष्टि की।

इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का फैसला लिया गया है।

ट्रंप का ऐलान और पाकिस्तान की भूमिका

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।” उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी को तुरंत हटाने के आदेश की भी जानकारी दी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि दोनों देश 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस शांति समझौते पर दस्तखत करेंगे। यदि यह होता है तो यह 47 वर्षों में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच उच्चस्तरीय बैठक होगी।

ईरान की तीन शर्तें

ईरान ने हस्ताक्षर से पहले तीन महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। ईरानी उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि MoU पर हस्ताक्षर के बाद शुरू होने वाली 60 दिनों की वार्ता अमेरिका द्वारा इन शर्तों को पूरा करने पर निर्भर करेगी।

ये शर्तें हैं:

  • नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त करना
  • युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना
  • ईरान के फ्रीज्ड फंड्स को जारी करना

समझौते के मुख्य बिंदु

दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में कई अहम प्रावधान शामिल हैं। इनमें युद्ध और सैन्य कार्रवाई रोकना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना, अमेरिकी नाकेबंदी हटाना और ईरान के कुछ फ्रीज्ड फंड जारी करना प्रमुख हैं।

इसके अलावा परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर अगले 60 दिनों में विस्तृत बातचीत का ढांचा भी तैयार किया गया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, लंबी और जटिल वार्ता के बाद यह MoU तैयार हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय महत्व

यह विकास वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग है। इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और तेल आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

दोनों पक्षों ने फिलहाल पूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार शांति की दिशा में यह बड़ा कदम है।

नोट: 19 जून को जेनेवा में होने वाले हस्ताक्षर समारोह पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं।

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