ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से लगातार घना काला धुआं निकल रहा है, जो पूरे इलाके के वातावरण को प्रदूषित कर रहा है।
प्लांट से निकलने वाला प्रदूषण और इसका प्रभाव
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि प्लांट के धुएं से निकलने वाली कालिख पेड़-पौधों और खेतों पर जमा हो रही है। इससे फसलों को नुकसान पहुंच रहा है और कृषि भूमि की उर्वरक क्षमता घट रही है।
रात के समय प्रदूषण की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का दावा है कि प्लांट प्रबंधन रात में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बंद कर देता है, जिससे बिना किसी रोक-टोक धुआं वातावरण में फैल जाता है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा असर
प्रदूषण के कारण गांव के लोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी बीमारियां आम हो गई हैं। लगातार प्रदूषित हवा में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
पहले भी दर्ज हो चुकी हैं शिकायतें
यह पहली बार नहीं है जब प्लांट के खिलाफ शिकायत की गई है। ग्रामीण बताते हैं कि पहले भी कई बार स्थानीय स्तर पर विरोध और लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने पर्यावरण विभाग और जिला प्रशासन से संयुक्त जांच टीम गठित कर प्लांट का निरीक्षण कराने की मांग की है। अन्य प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- रात के समय आकस्मिक निरीक्षण
- प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (ETP और ESP) की जांच
- प्रदूषण मानकों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना
- प्रभावित ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर
- उचित मुआवजे का प्रावधान
15 दिनों में कार्रवाई न हुई तो धरना-प्रदर्शन
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो ग्राम पंचायत, युवा और स्थानीय लोग मिलकर प्लांट के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने प्रशासन से शिकायत की गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई रिपोर्ट ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

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