प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम से पहले कोलकाता और पूरे पश्चिम बंगाल में दो दिवसीय भव्य तैयारियां की गईं। 19 जून को राज्य भर में 'रन फॉर योग' दौड़ का आयोजन किया गया, जबकि 20 जून को पश्चिम बengal दिवस के उपलक्ष्य में हुगली नदी के किनारे 'वंदे योगम' सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
योग दिवस पर प्रधानमंत्री का संबोधन
रेड रोड पर योग सत्र के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 21 जून का दिन पृथ्वी के कई हिस्सों में साल का सबसे लंबा दिन होता है और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कारण अब यह विश्व के सबसे बड़े सामूहिक उत्सव का दिन भी बन गया है।
उन्होंने कहा, “विश्व के अलग-अलग कोनों से योग की अद्भुत तस्वीरें आ रही हैं। हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक, पूर्वोत्तर और बंगाल से लेकर सौराष्ट्र तक, पूरा देश योग की ऊर्जा से सराबोर नजर आ रहा है। योग की ताकत ही है जो पूरे देश और पूरे विश्व को एक सूत्र में बांधती है।”
प्रधानमंत्री ने पूरे विश्व और मानव समुदाय को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
बंगाल की आध्यात्मिक भूमि पर विशेष महत्व
पीएम मोदी ने इस अवसर पर बंगाल में योग दिवस मनाने को विशेष बताते हुए कहा कि यह भूमि उन महान संतों और योगियों की है, जिन्होंने योग और आध्यात्मिकता को विश्व पटल पर पहुंचाया। उन्होंने भगवान रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद का स्मरण किया।
मोदी ने महर्षि अरविंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा, “योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है। यह जीवन का स्वभाव बन सकता है और जब ऐसा होता है तो यह मानवीय एकता की मजबूत नींव तैयार करता है। योग हर आयु वर्ग के लिए है और यह चेतना तथा ऊर्जा का प्रकाश है।”
वैश्विक स्तर पर योग का विस्तार
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस दुनिया भर में लगभग 2,500 स्थानों पर मनाया जा रहा है। 210 से अधिक भारतीय दूतावास और मिशन भी इसमें सक्रिय रूप से शामिल हैं। योग अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, सद्भाव और बेहतर जीवन शैली का प्रतीक बन चुका है।
विभिन्न देशों से आ रही तस्वीरें दर्शाती हैं कि योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और लोग इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बना रहे हैं।

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