चर्च कमेटी पर लगा हुक्का-पानी बंद करने का आरोप
यह पूरा विवाद कोटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मिशन कंपाउंड स्थित सीएनआई चर्च का है। पीड़ित हरीश लाल के अनुसार, नई कमेटी के गठन के बाद से ही पिछले दो वर्षों से उनके परिवार को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। मामले ने तब तूल पकड़ा जब आरोपियों ने सोशल मीडिया पर एक संदेश प्रसारित कर समाज के लोगों से पीड़ित परिवार से किसी भी प्रकार का संबंध न रखने, बातचीत बंद करने और उनके सुख-दुख में शामिल न होने की अपील की।
विवाद की शुरुआत 17 जनवरी को चर्च परिसर में आयोजित एक बैठक से हुई, जहाँ हरीश लाल पर क्रिसमस और ईस्टर जैसे पवित्र धार्मिक त्योहारों का अपमान करने का मनगढ़ंत आरोप लगाया गया। इसके तुरंत बाद पूरी कमेटी ने उनके परिवार को "नॉट इन गुड स्टैंडिंग" घोषित करते हुए समाज से बेदखल कर दिया।
बिशप के आदेश की अवहेलना और व्यापार पर रोक
पीड़ित लाल परिवार ने इस अन्याय के खिलाफ संस्था के प्रमुख बिशप डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़, रायपुर से संपर्क किया था। बिशप ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस सामाजिक बहिष्कार को पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक करार दिया था। इसके बावजूद, आरोपियों ने बिशप के निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित के मिशन कंपाउंड स्थित कार गैरेज के मुख्य द्वार पर अवैध रूप से ताला जड़ दिया, जिससे उनका व्यवसाय ठप हो गया है।
अदालत के आदेश पर कोटा पुलिस ने दर्ज किया मामला
स्थानीय पुलिस स्तर पर जब पीड़ित परिवार की सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने न्याय के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीप्ति बरवा की अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने कोटा पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने निम्नलिखित 7 नामजद पदाधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत नफरत फैलाने, धमकी देने और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया है:
पास्टर मनीष आर. मसीह
सौरभ पीटर्स
राजा सालोमान दास
अनिल मसीह
थियोडोर पीटर्स
सुनीलेश पीटर्स
सुलेमान दास
कोटा थाना पुलिस ने मामले को विवेचना में ले लिया है और आरोपियों के खिलाफ वैधानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

खबरें नहीं सच का प्रहार
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