यह महत्वपूर्ण बैठक भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय मंत्री एवं विद्युत प्रभारी राधेश्याम जायसवाल के नेतृत्व में संपन्न हुई। वार्ता के दौरान ओपीएस के अलावा बिजली कंपनियों में स्टाफ की भारी कमी, कर्मचारियों पर बढ़ता काम का दबाव और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि कंपनियों में नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के लिए विज्ञापन जारी किए जाएंगे और भविष्य में संविदा कर्मचारियों को नियमितीकरण के अवसर भी दिए जाएंगे।
प्रदेशव्यापी आंदोलन को मिल रहा है व्यापक समर्थन
महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार, अपनी जायज मांगों को लेकर बिजली कर्मियों का प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन पहले से ही गति पकड़ चुका है। आंदोलन की रूपरेखा कुछ इस प्रकार तय की गई है:
प्रथम चरण (1 से 30 जून): पूरे छत्तीसगढ़ में सघन जनजागरण और हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।
द्वितीय चरण (1 से 9 जुलाई): सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों एवं विद्युत उत्पादन केंद्रों पर आमसभा, प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
संगठन का दावा है कि इस अभियान को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
मांगें पूरी नहीं होने पर 17 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
मुख्यमंत्री से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद भी महासंघ ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की तरफ से कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं आता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन तय कार्यक्रम के अनुसार ही चलेगा।
इसी कड़ी में आगामी 10 जुलाई को रायपुर के डंगनिया स्थित पावर कंपनी मुख्यालय में एक विशाल आमसभा, आक्रोश प्रदर्शन और सरकार को चेतावनी ज्ञापन सौंपने की घोषणा की गई है। इसके बावजूद यदि तय समय में मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो आगामी 17 अगस्त से पूरे छत्तीसगढ़ में अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। महासंघ ने राज्य के सभी बिजली अधिकारियों और कर्मचारियों से एकजुट होकर इस आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया है।
बिजली कर्मचारियों की इस संभावित अनिश्चितकालीन हड़ताल से राज्य की विद्युत आपूर्ति और आवश्यक शासकीय सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

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