Breaking News

Husband Killed Wife News: पत्नी के ताने पर की हत्या, HC ने उम्रकैद की सजा घटाई

 जबलपुर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मर्डर केस में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी पति को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि पत्नी द्वारा पति के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने वाली टिप्पणी के बाद उपजे गंभीर आक्रोश के कारण यह घटना हुई। हाईकोर्ट ने इसे पूर्व-नियोजित हत्या (Planned Murder) न मानते हुए 'गैर-इरादतन हत्या' की श्रेणी में रखा है। इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पति की उम्रकैद की सजा को घटाकर 7 साल के कारावास में तब्दील कर दिया है।

क्या है पूरा मामला और विवाद की वजह?

यह घटना मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की है। सितंबर 2021 में शिव कहार और उसकी पत्नी किरण के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हो गई थी। विवाद के दौरान पत्नी किरण ने अत्यधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “मुझे तुम्हारे जैसे हजार पति मिल जाएंगे।” यह टिप्पणी सुनते ही शिवा अपना मानसिक संतुलन खो बैठा।

उसने तत्काल आवेश में आकर पास ही पड़े एक पत्थर से पत्नी के सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया। इस अचानक हुए जानलेवा हमले के कारण सात महीने की गर्भवती किरण की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी ने भागने या साक्ष्य छुपाने का प्रयास नहीं किया, बल्कि स्वयं पुलिस और परिजनों को इस घटना की सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था।

निचली अदालत का फैसला और हाईकोर्ट की टिप्पणी

साल 2021 की इस घटना पर छिंदवाड़ा की जिला अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने साल 2024 में अपना फैसला सुनाया था। ट्रायल कोर्ट ने शिवा को धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट ने मामले की गहन समीक्षा के बाद स्पष्ट किया कि मृतका द्वारा कहे गए शब्द किसी भी पति के अस्तित्व और सम्मान को पूरी तरह से नकारने वाले थे। अदालत के अनुसार, इस बयान ने आरोपी को 'अचानक और गंभीर उकसावा' (Sudden and Grave Provocation) दिया, जिससे उत्पन्न हुए तात्कालिक गुस्से में यह कृत्य हुआ।

क्यों बदली गई उम्रकैद की सजा?

माननीय उच्च न्यायालय ने सजा कम करने के पीछे मुख्य रूप से आरोपी के घटना के बाद के आचरण को आधार बनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:

  • अपराध की प्रकृति: घटना पूर्व-नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक उपजे विवाद का परिणाम थी।

  • आरोपी का व्यवहार: वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी शिवा ने न तो साक्ष्य मिटाने की कोशिश की और न ही वह कानून से भागा।

  • कानूनी सहयोग: आरोपी ने खुद जिम्मेदारी लेते हुए पुलिस और अपने रिश्तेदारों को मामले से अवगत कराया।

इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत हत्या का नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या का बनता है, जिसके आधार पर उसकी सजा को संशोधित किया गया।

0 Comments