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राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) की शुचिता और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सरकार आगामी सत्रों में व्यापक बदलाव करने की योजना बना रही है। बुधवार को आयोजित संसदीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक में विशेषज्ञों और सांसदों ने NEET UG 2027 को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के रूप में आयोजित करने और इसे JEE Main की तर्ज पर कई चरणों (मल्टी-शिफ्ट) में कराने की पुरजोर सिफारिश की है। बैठक के दौरान यह तर्क दिया गया कि एक ही दिन 22 लाख से अधिक परीक्षार्थियों की परीक्षा आयोजित करने से सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर बड़ी चुनौतियां खड़ी होती हैं।

संसदीय समिति के अहम सुझाव और सिफारिशें

संसदीय समिति की बैठक मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के प्रबंधन में आ रही दिक्कतों और प्रशासनिक चुनौतियों की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। इस बैठक में समिति ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की:

  • मल्टी-शिफ्ट परीक्षा: सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए परीक्षा को एक ही दिन कराने के बजाय अलग-अलग शिफ्टों में विभाजित किया जाए।

  • डिजिटल बुनियादी ढांचा: समिति ने यह स्पष्ट किया है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को देशव्यापी स्तर पर लागू करने से पहले सभी क्षेत्रों में पर्याप्त डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है।

  • प्रवेश परीक्षाओं का वर्गीकरण: कुछ सांसदों ने यह सुझाव भी दिया कि MBBS, AYUSH और Nursing पाठ्यक्रमों के लिए एक ही परीक्षा कराने के बजाय अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाएं। हालांकि, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर अंतिम निर्णय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लिया जाएगा।

राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट और NTA का आश्वासन

बैठक में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन भी शामिल हुए, जिन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणालियों के ढांचे को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। NTA ने समिति को भरोसा दिलाया है कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाएगा ताकि परीक्षाएं पूरी तरह नकल-मुक्त और पारदर्शी हो सकें। इसके अतिरिक्त, संसदीय समिति ने इस वर्ष 21 जून को आयोजित हुई NEET UG परीक्षा के सुरक्षित और सफल संचालन की सराहना भी की।

तकनीकी विकास और भावी रूपरेखा

यह समिति NEET UG 2026 की री-एग्जाम से जुड़े परिणामों, परीक्षा आयोजन के दौरान सामने आईं तकनीकी एवं प्रशासनिक बाधाओं की भी विस्तृत जांच कर रही है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस बैठक में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका पर भी गहन मंथन किया गया। इसके साथ ही, बच्चों के मानसिक विकास पर सोशल मीडिया के पड़ रहे प्रभावों को लेकर भी अधिकारियों और समिति के सदस्यों के बीच चर्चा हुई।

NEET UG परीक्षा के स्वरूप और चिकित्सा पाठ्यक्रमों के वर्गीकरण को लेकर किए जाने वाले इन बदलावों पर अंतिम मुहर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही लगेगी।

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