गजपति महाराजा निभाएंगे 'छेरा पहरा' की पावन परंपरा
नयन उत्सव के संपन्न होने के बाद पुरी के गजपति महाराजा पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार सोने की मूंठ वाली झाड़ू से रथों के मार्ग को साफ करने की 'छेरा पहरा' रस्म अदा करेंगे। सनातन परंपरा में इस अनुष्ठान का विशेष महत्व है, जो यह संदेश देता है कि भगवान के सामने सभी समान हैं। इस महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया के पूर्ण होते ही तीनों देवी-देवताओं को आधिकारिक तौर पर उनके निर्धारित रथों पर विराजमान कराया जाएगा और रथयात्रा की मुख्य शुरुआत होगी।
पहांडी अनुष्ठान और रथों का विवरण
आज दोपहर 12:30 बजे से 1:00 बजे के बीच अभिजीत मुहूर्त में मुख्य 'पहांडी अनुष्ठान' आयोजित किया जाएगा। शंख ध्वनि, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के गूंजते स्वर के बीच भगवान जगन्नाथ को उनके रथ 'नंदीघोष', भइया बलभद्र को 'तालध्वज' और बहन सुभद्रा को 'दर्पदलन' रथ पर आसीन किया जाएगा।
पुरी रथ यात्रा 2026: समय सारणी और प्रमुख अनुष्ठान
उत्सव को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन द्वारा निम्नलिखित समय सारणी तय की गई है:
साकल धूप (पूजा): सुबह 8:00 बजे से 9:00 बजे तक
रथ प्रतिष्ठा: सुबह 9:00 बजे
मंगलार्पण: सुबह 9:15 बजे
पहांडी रस्म: सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
चिता लागी: दोपहर 1:30 बजे से 2:00 बजे तक
छेरा पहनरा: दोपहर 2:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक
घोड़े और सारथी स्थापना: शाम 3:00 बजे से 4:00 बजे तक
रथ यात्रा का शुभारंभ (रथ खींचना): शाम 4:00 बजे से
सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुरी प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। रथयात्रा का सीधा प्रसारण (Live Telecast) विभिन्न धार्मिक चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी किया जा रहा है।

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