बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से चंद सेकंड में मिलेगा अनाज
इस नई व्यवस्था के लागू होने से नेटवर्क की खराबी और राशन दुकान संचालकों की मनमानी जैसी समस्याओं से पूरी तरह निजात मिल जाएगी। 'अन्नापूर्ति मशीन' के पास जाकर उपभोक्ताओं को केवल अपना बायोमेट्रिक (अंगूठे का निशान) लगाना होगा और कुछ ही सेकंड के भीतर उनका राशन उनके हाथ में होगा। डिजिटल और ऑटोमैटिक होने के कारण यह प्रणाली समय की बचत करेगी और PDS राशन की कालाबाजारी तथा अवैध भंडारण को रोकने में बेहद प्रभावी साबित होगी।
जानिए कैसे काम करती है यह चावल एटीएम मशीन
चावल वितरण की यह स्वचालित मशीन आधुनिक तकनीक पर आधारित है, जहाँ मैन्युअल तौल करने की आवश्यकता नहीं होती। इसकी कार्यप्रणाली बेहद सरल और सुरक्षित है:
राशन कार्ड प्रविष्टि: हितग्राही को सबसे पहले मशीन में अपना राशन कार्ड नंबर दर्ज करना होगा।
आधार वेरिफिकेशन: नंबर दर्ज करने के बाद बायोमेट्रिक सिस्टम के जरिए उपभोक्ता का आधार सत्यापन किया जाएगा।
कोटा प्रदर्शन: सत्यापन सफल होते ही स्क्रीन पर परिवार के सदस्यों के अनुसार निर्धारित चावल की मात्रा प्रदर्शित होने लगेगी।
वितरण सीमा: यह विशेष एटीएम मशीन एक बार में अधिकतम 25 किलोग्राम तक राशन उपलब्ध कराने की क्षमता रखती है।
महिला स्व-सहायता समूह संभालेंगे संचालन की कमान
देश स्तर पर देखा जाए तो छत्तीसगढ़ से पहले गुजरात और ओडिशा जैसे राज्यों में इस तरह की खाद्यान्न मशीनें सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। हाल ही में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, डायरेक्टर फरिया आलम और कलेक्टर अभिजित सिंह ने इस मशीन की टेस्टिंग प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया है। इस परियोजना की एक खास बात यह भी है कि इसके संचालन की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी जाएगी, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
सहायक खाद्य अधिकारी शशि सिंह के अनुसार, शुरुआती चरण में इस मशीन को सुबह से लेकर रात 10 बजे तक संचालित किया जाएगा, जिसके बाद इसे पूरी तरह से 24 घंटे कार्यशील रखने की योजना है।
आगामी दिनों में भिलाई के इस पहले केंद्र के सफल संचालन और फीडबैक के आधार पर खाद्य विभाग द्वारा प्रदेश के अन्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है।

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