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अमेरिका में स्टूडेंट वीजा पर सख्ती , अब पढाई के लिये रहने की अधिकतम अवधि 4 वर्ष से अधिक नही होगी

अमेरिका से एक बड़ी खबर आ रही है। अगर आप वहां पढ़ाई कर रहे हैं, जाने की तैयारी में हैं या मीडियाकर्मी हैं, तो यह खबर सीधे आपके काम की है। वॉशिंगटन में प्रशासन ने गुरुवार को वीजा से जुड़े नियमों में एक बड़ा फेरबदल कर दिया। सरकार ने उस बरसों पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिसकी आड़ में लोग बिना किसी कड़ी सरकारी निगरानी के अनिश्चितकाल तक अमेरिका में टिके रहते थे।

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने साफ शब्दों में कहा है कि अब F, J और I वीजा कैटेगरी के लोगों के लिए वहां रुकने का एक तय वक्त मुकर्रर कर दिया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि F वीजा छात्रों के लिए होता है, J वीजा एक्सचेंज विजिटर्स के लिए और I वीजा पत्रकारों को दिया जाता है।

अब 4 साल की समय सीमा तय

नए नियमों को देखें तो विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स को अब उनके कोर्स की अवधि के हिसाब से ही देश में रहने की इजाजत मिलेगी। लेकिन सरकार ने इस पर भी चार साल की एक अधिकतम सीमा लगा दी है।

इस फैसले की वजह बताते हुए डीएचएस सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन ने कहा कि पिछले कई दशकों से विदेशी छात्रों को अमेरिका में बिना किसी तय समय सीमा के रहने की छूट मिली हुई थी। इसका नतीजा यह हुआ कि हजारों लोग सिर्फ अमेरिका में टिके रहने के लिए एक के बाद एक नए कोर्स में दाखिला लेते जा रहे थे। यह सीधे तौर पर हमारे इमिग्रेशन सिस्टम का गलत इस्तेमाल था। मुलिन का मानना है कि अब समय सीमा तय होने से सरकार देश के भीतर रह रहे लोगों की सही ढंग से जांच और निगरानी कर सकेगी। सरकार चाहती है कि छात्र यहां सिर्फ पढ़ाई करने आएं और कोर्स खत्म होते ही अपने वतन लौट जाएं।

कॉलेज नहीं, अब सीधे सरकार करेगी जांच

देखा जाए तो साल 1978 से चली आ रही पुरानी ढील की वजह से कई लोग हमेशा के लिए 'स्टूडेंट' बने रहते थे ताकि उन्हें वापस न जाना पड़े। सरकार ने अब इस लूपहोल को पूरी तरह बंद कर दिया है।

अब अगर किसी छात्र को पढ़ाई के लिए चार साल से ज्यादा का वक्त चाहिए, तो कॉलेज प्रशासन के पास इसे बढ़ाने का अधिकार नहीं होगा। छात्र को खुद सीधे 'यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज' (USCIS) के पास जाना होगा और एक्सटेंशन के लिए औपचारिक अर्जी देनी होगी।

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अब निगरानी का जिम्मा यूनिवर्सिटी स्टाफ के बजाय सीधे फेडरल अथॉरिटीज यानी केंद्रीय अधिकारियों के पास आ गया है। ऐसे में जो भी छात्र समय बढ़वाने के लिए आवेदन करेगा, उसे बायोमेट्रिक जांच, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और फ्रॉड स्क्रीनिंग जैसी कड़ी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और वीजा के घालमेल को रोकने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

तैयारी के दिन भी हुए आधे

नया नियम कोर्स या कॉलेज बदलने की प्रक्रिया को भी काफी मुश्किल बनाता है। इसके अलावा एक और बड़ा झटका ग्रेस पीरियड को लेकर लगा है। F-1 वीजा वाले छात्रों को पढ़ाई पूरी होने के बाद देश छोड़ने की तैयारी करने, संस्थान बदलने या अपना स्टेटस चेंज करने के लिए पहले 60 दिनों का वक्त मिलता था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 30 day कर दिया गया है।

रही बात उन लोगों की जो पहले से पुराने नियमों के तहत अमेरिका में रह रहे हैं, तो वे भी खुद-ब-खुद इस नई व्यवस्था के दायरे में आ जाएंगे। नया नियम लागू होने की तारीख से उनके पास अमेरिका में रहने के लिए अधिकतम चार साल का ही समय बचेगा।

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