नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन के टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को घटा दिया है, जबकि डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर इसे बढ़ा दिया है। टैक्स की ये नई दरें आज, 16 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई हैं। राहत की बात यह है कि इस टैक्स संशोधन का आम जनता पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा और खुदरा बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी।
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के टैक्स में हुआ यह संशोधन
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके विपरीत, डीजल के निर्यात शुल्क में भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, हवाई ईंधन यानी एटीएफ (ATF) पर विंडफॉल टैक्स को 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यह कदम घरेलू बाजार में आपूर्ति को संतुलित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
वैश्विक तनाव से 2% तक महंगा हुआ कच्चा तेल
यह टैक्स संशोधन ऐसे समय में किया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई बाधित हुई है। ईरान द्वारा नौसैनिक नाकाबंदी लागू किए जाने से होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई होती है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता और तेल टैंकरों पर हमलों के चलते ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जो कि एक महीने का उच्चतम स्तर है। हालांकि, वैश्विक मांग में सुस्ती और महंगाई की चिंताओं ने इस बढ़त को कुछ हद तक सीमित भी किया है।
ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले भी लिए गए कड़े फैसले
उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने 11 जून को एक बड़ा कदम उठाते हुए औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत उपभोक्ताओं के खुदरा ईंधन पंपों से पेट्रोल-डीजल खरीदने पर रोक लगा दी थी। इन बड़े उपभोक्ताओं को केवल थोक सप्लाई चैनलों से ही खरीदारी करने का निर्देश दिया गया था।
यह अस्थायी आदेश निम्नलिखित वजहों से लागू किया गया था:
जमाखोरी पर लगाम: ईंधन की अवैध हेर-फेर और जमाखोरी को रोकना।
सप्लाई चैन का संतुलन: आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-पंपों पर निर्बाध सप्लाई बनाए रखना।
दरों का अंतर: उस समय दिल्ली में रिटेल डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर था, जबकि थोक खरीदारों के लिए यह दर 134.50 रुपये प्रति लीटर थी। इस बड़े अंतर के कारण थोक खरीदार खुदरा पंपों से खरीदारी करने लगे थे, जिससे खुदरा बिक्री असामान्य रूप से बढ़ गई थी।
यह टैक्स बदलाव तेल निर्यात करने वाली कंपनियों पर लागू होगा। आम उपभोक्ताओं के लिए दैनिक खुदरा दरें (Retail Rates) यथावत बनी हुई हैं।

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