13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे 30 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड संकेतों की जानकारी और वाहन की मूलभूत मरम्मत का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर जिला प्रशासन सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि वे तुरंत रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।
प्रशिक्षणार्थी सोड़ी सोमड़ी कहती हैं कि इस प्रशिक्षण ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया है और अब उन्हें सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद दिखाई दे रही है। वहीं पुनेम ज्योति का कहना है कि ड्राइविंग कौशल उनके लिए भविष्य में आजीविका का मजबूत आधार बनेगा।
कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। आरसेटी की यह पहल साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, बदलाव की राह हमेशा खुली रहती है। आज इन युवाओं की स्टेयरिंग पर मजबूत पकड़ केवल गाड़ियों को नहीं, बल्कि उनके जीवन को भी नई मंजिल की ओर ले जा रही है।

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