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छत्तीसगढ़ सरकार के 2 बड़े फैसले : सोलर उपभोक्ताओं को झटका, सरप्लस बिजली की खरीद दरें घटीं ,व्यापारियों और बिजली भुगतान पर नया नियम लागू

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार और संबंधित विभागों द्वारा प्रदेश के विकास तथा आर्थिक ढांचे को सुव्यवस्थित करने के लिए दो बड़े फैसले लिए गए हैं। राज्य बिजली नियामक आयोग और कैबिनेट के स्तर पर हुए इन बदलावों का सीधा असर प्रदेश के सौर ऊर्जा उत्पादकों (सोलर उपभोक्ताओं) और व्यापारिक वर्ग पर पड़ने जा रहा है। इन नए नीतिगत बदलावों के तहत जहां एक ओर सोलर पैनल के माध्यम से कमाई करने वाले उपभोक्ताओं के मुनाफे में कमी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों को विनियमित करने के लिए नए नियम प्रभावी कर दिए गए हैं।

फैसला 1: सोलर उपभोक्ताओं को झटका, सरप्लस बिजली की खरीद दरें घटीं

छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग (CSERC) ने राज्य में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं और सौर ऊर्जा उत्पादकों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। इसके तहत ग्रिड में सप्लाई की जाने वाली अतिरिक्त (सरप्लस) सौर ऊर्जा की दरों में बड़ी कटौती की गई है:

  • पुरानी दरें: वित्त वर्ष 2025-26 में बिजली कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं से सरप्लस सोलर बिजली ₹2.50 प्रति यूनिट की दर से खरीदी जा रही थी।

  • नई दरें: नए वित्तीय वर्ष के लिए इस टैरिफ को घटाकर अब ₹1.94 प्रति यूनिट निर्धारित कर दिया गया है।

  • आर्थिक प्रभाव: दरों में 56 पैसे प्रति यूनिट की इस कमी के कारण अब ग्रिड में बिजली बेचने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाला भुगतान कम हो जाएगा, जिससे उनकी होने वाली नियमित कमाई सीधे तौर पर प्रभावित होगी।

फैसला 2: व्यापारियों और बिजली भुगतान पर नया नियम लागू

छत्तीसगढ़ शासन ने अपनी हालिया कैबिनेट बैठक में व्यापारिक जगत, उद्योगों और वाहन नियमों को लेकर कई दूरगामी निर्णय लिए हैं। इसके साथ ही राज्य में बिजली आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए केंद्रीय बिजली कंपनियों (जैसे NTPC) के साथ होने वाले भुगतान के पुराने त्रिपक्षीय समझौते को समाप्त कर दिया गया है।

  • डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (DDM) प्रणाली: अब नए नियम के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार डायरेक्ट डेबिट मैंडेट व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे बिजली कंपनियों को बिना किसी रुकावट के समय पर सुरक्षित भुगतान मिल सकेगा।

  • व्यापारियों पर असर: इस पारदर्शी और सुरक्षित बैंकिंग व्यवस्था के लागू होने से उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को मिलने वाली बिजली की आपूर्ति अधिक सुचारू और निर्बाध होगी, जिससे राज्य में किसी भी संभावित बिजली संकट का खतरा टल जाएगा।

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