हाल ही में उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज किए जाने के बाद, अब देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की गतिविधियां पूरी तरह थम गई हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, वर्तमान में देश के अलग-अलग राज्यों में बारिश के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं और आगामी कुछ दिनों तक मौसम का यही मिजाज बने रहने का पूर्वानुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि कई हफ्तों के अनियमित मानसून के बाद, अब प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रहा अल नीनो (El Nino) भारतीय मौसम चक्र को प्रभावित करने लगा है।
अल नीनो की सक्रियता से बाधित हुई मानसूनी हवाएं
कमजोर मानसून और शुष्क मौसम की दोहरी मार
जून के आखिरी और जुलाई के शुरुआती दिनों में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अच्छी मानसूनी बारिश हुई थी, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि देरी से आया मानसून अब सामान्य स्थिति में लौट रहा है। हालांकि, यह सिलसिला जल्द ही धीमा हो गया। मौसम विभाग के मुताबिक:
मध्य, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों में अगले तीन से चार दिनों तक बारिश की गतिविधियां बेहद सीमित या न के बराबर रहने की संभावना है।
देश के कई राज्यों में वर्तमान में औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की जा रही है।
आने वाले दिनों में भारी या झमाझम बारिश की कोई भी संभावना नजर नहीं आ रही है।
जलवायु परिवर्तन और अल नीनो का संयुक्त प्रभाव
कृषि और खरीफ फसलों पर संकट के बादल
भारत में कृषि क्षेत्र की मानसून पर अत्यधिक निर्भरता को देखते हुए, बारिश की यह कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। मानसून के आगमन में पहले ही देरी हो चुकी थी, और अब बारिश के इस लंबे अंतराल ने भारतीय किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है। समय पर पर्याप्त वर्षा न होने के कारण खरीफ फसलों की बुआई और उनके कुल उत्पादन पर सीधा विपरीत असर पड़ने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।


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