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 नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान को लेकर जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों पर केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच राजनीतिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। तमिलनाडु की सत्ताधारी गठबंधन सरकार ने गृह मंत्रालय के इस आदेश का पुरजोर विरोध किया है। राज्य के राजनीतिक नेतृत्व का स्पष्ट कहना है कि वे सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' (राष्ट्रीय गीत) गाने के बजाय अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार राष्ट्रगान से पहले 'तमिल थाई वाझथु' (राज्य प्रार्थना गीत) गाने की व्यवस्था को ही निरंतर जारी रखेंगे।

गृह मंत्रालय ने जारी किया नया नियमों का प्रोटोकॉल

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान को गाने और बजाने के नियमों को संहिताबद्ध (प्रोटोकॉल तय) किया है। इस अधिसूचना में विशेष रूप से उन राज्यों का उल्लेख किया गया है जहाँ सरकारी आयोजनों में राजकीय गीत गाने की परंपरा है। मंत्रालय के नए नियमों के मुताबिक, जब भी किसी आधिकारिक कार्यक्रम में स्टेट सॉन्ग (राजकीय गीत) को नेशनल सॉन्ग (राष्ट्रीय गीत) और नेशनल एंथम (राष्ट्रगान) के साथ प्रस्तुत किया जाएगा, तो वहां सबसे पहले राष्ट्रीय गीत बजाया या गाया जाएगा और उसके बाद ही राष्ट्रगान की प्रस्तुति होगी।

तमिलनाडु में नया भाषाई और राजनीतिक विवाद छिड़ा

केंद्र सरकार के इस नए नियम ने तमिलनाडु के सियासी गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, क्योंकि राज्य में सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत अनिवार्य रूप से 'तमिल थाई वाझ्थु' से करने की स्थापित परंपरा रही है। विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के सांसद डी रविकुमार ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि वे राष्ट्रीय गीत नहीं गाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके कार्यक्रमों में पहले राज्य गीत गाया जाएगा और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान में राष्ट्रगान मुख्य रूप से राज्यपाल के कार्यक्रमों के दौरान ही गाया जाता है।

अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण से जुड़ा घटनाक्रम

यह नया विवाद राज्य में इस साल मई महीने में अभिनेता से नेता बने विजय के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उपजे घटनाक्रम की याद दिलाता है। उस समय राज्य के पारंपरिक रिवाज के विपरीत, समारोह में सबसे पहले वंदे मातरम बजाया गया, उसके बाद जन गण मन और अंत में तमिल थाई वाज़्थु प्रस्तुत किया गया था। इस क्रम की द्रमुक (DMK) गठबंधन के नेताओं ने तीखी आलोचना की थी। भारी विरोध के बाद मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने कांग्रेस, वामपंथी दलों, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) जैसे अपने सहयोगी दलों को आश्वस्त किया था कि भविष्य के सरकारी कार्यों में राष्ट्रगान से पहले हमेशा तमिल थाई वाज्थु ही बजाया जाएगा।

गृह मंत्रालय द्वारा तय किए गए विशिष्ट नियम और अवसर

गृह मंत्रालय के इस नए आदेश में यह भी दोहराया गया है कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान की प्रस्तुति के समय आधिकारिक रूप से निर्धारित बोल (लिरिक्स) और शुद्ध उच्चारण का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। अधिसूचना के अनुसार, दोनों के लिए निम्नलिखित अवसर तय किए गए हैं:

  • राष्ट्रीय गीत (National Song): नागरिक अलंकरण समारोहों में, औपचारिक राज्य कार्यों में राष्ट्रपति, राज्यपाल और उपराज्यपाल के आगमन व प्रस्थान पर, ऑल इंडिया रेडियो और टेलीविजन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन के पहले और बाद में, तथा परेड में राष्ट्रीय ध्वज लाए जाने के समय।

  • राष्ट्रगान (National Anthem): सिविल व सैन्य अलंकरण (इंवेस्टीचर) समारोहों में, औपचारिक राष्ट्रीय सलामी, परेड, आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति व राज्यपाल के आगमन और प्रस्थान पर, राष्ट्रपति के राष्ट्रीय प्रसारण के पहले व बाद में, रेजिमेंटल कलर्स की प्रस्तुति और नौसेना के ध्वजारोहण (नेवल कलर-होइस्टिंग) समारोहों के दौरान।

केंद्र सरकार का तर्क है कि यह निर्देश केवल राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को एक समान व्यवस्था में लाने के लिए है, जबकि तमिलनाडु में राज्य गीत की स्थिति बेहद संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा होने के कारण इस पर राजनीतिक गतिरोध बढ़ने की संभावना है।

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