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कवर्धा, छत्तीसगढ़ में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है भोरमदेव जंगल सफारी में । 'ईको-टूरिज्म' के तहत स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों को प्रकृति से जोड़ने की नई पहल शुरू की गई है, जिसमें पर्यटकों को आकर्षित करने वाले शानदार मॉडल शामिल हैं।

              छत्तीसगढ़ सरकार की इको-टूरिज्म पहल के तहत विकसित भोरमदेव जंगल सफारी संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान बनकर उभरी है। जंगल सफारी प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है, सिर्फ एक माह में ही 489 से अधिक पर्यटक यहां पहुंचे हैं, वहीं स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं आमदनी के नए अवसर मिले हैं। भोरमदेव जंगल सफारी प्रकृति, रोमांच और स्थानीय विकास का सफल संगम बनी यह पहल भोरमदेव को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है।

एक माह में पहुंचे सैंकड़ों पर्यटक

यह जंगल सफारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है। वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव जंगल सफारी का उद्घाटन 3 मई को कर पर्यटकों के लिए इसका संचालन शुरू किया गया था। मानसून को देखते हुए 4 जून से सफारी को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। मात्र एक माह के संचालन के दौरान 480 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे पौने 3 लाख रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। बारिश के बाद नवंबर माह से इसका संचालन फिर से शुरू होगा। 

पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को मिला रोजगार

       भोरमदेव जंगल सफारी की शुरुआत से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं। केवल एक महीने के संचालन में वाहन चालक, गाइड और गेट कीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार और वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन भी पर्यटकों की पसंद बनी रही। एक माह में कैंटीन से 20 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा हुआ, जिससे समूह की महिलाओं की आय बढ़ी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती मिली।

सिर्फ सफारी ही नहीं, उद्यान भी बना आकर्षण का केंद्र

       जंगल सफारी के साथ-साथ भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पसंद बन रहा है। सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अलावा 1500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भी भ्रमण किया। इससे साफ है कि भोरमदेव क्षेत्र धीरे-धीरे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना रहा है।

वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग ने बढ़ाया आकर्षण

       करीब 36 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को कई वन्यजीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अवसर मिला। सफारी में भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न (टाइगर पगमार्क), जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और रंग-बिरंगी तितलियां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहीं। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वातावरण ने सफारी को रोमांचक और यादगार अनुभव बना दिया।

इको-टूरिज्म की नई पहचान

        वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग तैयार किया गया है। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के पास करियाआमा क्षेत्र में स्थित है, जहां से पर्यटक अपनी जंगल यात्रा शुरू करते हैं। इस सफारी के माध्यम से पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन, वन्यजीव, जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

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