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रायगढ़, छत्तीसगढ़ सरकार वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में  रायगढ़ में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए 78 वन अधिकारियों एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान तथा संरक्षण संबंधी प्रयासों को मजबूत बनाना था।

मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों से निपटने की तैयारी

         छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 450 हाथी विचरण कर रहे हैं। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि हाथियों की मृत्यु के वास्तविक कारणों की सटीक जानकारी मिलने से भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

हाथी की मृत्यु को माना जाएगा संभावित अपराध स्थल

      प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि जंगल में मृत पाया गया हाथी केवल एक वन्यजीव मृत्यु का मामला नहीं, बल्कि संभावित अपराध स्थल भी हो सकता है। इसलिए घटनास्थल की सुरक्षा, साक्ष्य संग्रहण, विषप्रयोग, शिकार अथवा अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

फोरेंसिक जांच और नमूना संरक्षण की दी गई जानकारी

         विशेषज्ञों ने वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य प्रबंधन तथा मृत्यु जांच की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से अवगत कराया। प्रशिक्षण में जैविक नमूनों के संग्रहण, संरक्षण और प्रयोगशाला परीक्षण के लिए सुरक्षित तरीके अपनाने की जानकारी भी दी गई। वन्यजीव अपराधों, विशेषकर हाथीदांत तस्करी से जुड़े मामलों में कानूनी साक्ष्य तैयार करने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों और प्रमाणों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया।

फील्ड में मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
        प्रशिक्षण के दूसरे दिन प्रतिभागियों को मैदानी स्तर पर शव परीक्षण, रक्त एवं ऊतक नमूना संग्रहण, रोग एवं विष विज्ञान जांच तथा दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से जांच कार्य करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इससे अधिकारियों की तकनीकी क्षमता और दक्षता में वृद्धि होगी।

विशेषज्ञ संस्थानों ने साझा किया अनुभव
           कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान तथा वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने आधुनिक जांच तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी दी। अचानकमार टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक श्रीमती प्रियंका पांडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाई।

वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती
         प्रशिक्षण के माध्यम से सभी 78 प्रतिभागियों को हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों की मृत्यु जांच के लिए मानकीकृत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इससे वन विभाग की फोरेंसिक जांच, रोग निगरानी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण और संरक्षण संबंधी क्षमता और मजबूत होगी। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के माध्यम से हाथियों सहित सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो प्रदेश में हाथियों के दीर्घकालिक संरक्षण और बेहतर वन्यजीव प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगा।

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