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जगदलपुर, बस्तर के घने जंगलों और सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों की सुरक्षा तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बस्तर वनमंडल ने एक संवेदनशील और अनूठी पहल की है। जंगलों के आसपास स्थित खुले और असुरक्षित कुओं पर लोहे की नेट लगाई जाएगी, जिसके तहत वन विभाग ने इन कूपों के चारों ओर पैरापेट वॉल यानी मुंडेर बनाकर उन्हें लोहे की मजबूत सुरक्षा जालियों से ढंकने के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया है। यह पूरा अभियान मुख्य वन संरक्षक जगदलपुर वन वृत्त श्री आलोक तिवारी के कुशल मार्गदर्शन और बस्तर वनमंडलाधिकारी श्री उत्तम कुमार गुप्ता के नेतृत्व में मानसून से पहले पूरा करने के लक्ष्य के साथ चलाया जा रहा है। वनांचलों और कृषि भूमि पर बने बिना मुंडेर के खुले कुएँ लंबे समय से मूक वन्य प्राणियों के लिए एक गंभीर और प्राणघातक खतरा बने हुए थे, जहाँ पानी की तलाश में या रात के अंधेरे में भटकते हुए तेंदुए, भालू और हिरण जैसे अनेक वन्यजीव अक्सर गिरकर असमय काल के गाल में समा जाते हैं या गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। ऐसी घटनाओं से न केवल जैव-विविधता को अपूरणीय क्षति पहुँचती है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों में भी भय और असुरक्षा का माहौल बन जाता है।

    आगामी मानसून सत्र में जलभराव की स्थिति को देखते हुए इस अभियान को तीव्र गति दी गई है, जिसके तहत वन विभाग के मैदानी अमले ने संवेदनशील इलाकों का व्यापक सर्वे कर 29 ऐसे खतरनाक कुओं को चिन्हित किया है जिन्हें तुरंत सुरक्षित किया जा रहा है। उप-वनमंडलाधिकारियों और परिक्षेत्र अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी में कुओं के चारों ओर मजबूत दीवार उठाकर उन्हें लोहे की भारी ग्रिल से ढंका जा रहा है, ताकि कोई भी जानवर दुर्घटना का शिकार न हो सके। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ वन्यजीवों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय ग्रामीणों, खेलते हुए बच्चों और चरने वाले मवेशियों को भी हमेशा के लिए दुर्घटना के डर से मुक्ति मिल जाएगी। इस प्रकार यह ढांचागत सुरक्षा उपाय समाज के सभी वर्गों को एकसाथ संरक्षण प्रदान करते हुए एक समग्र जन-कल्याणकारी अभियान का रूप ले चुका है।

    इस महत्वपूर्ण पहल को लेकर वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कहा कि वन्यजीव हमारी प्राकृतिक पारिस्थितिकी के अभिन्न अंग हैं और उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि बस्तर वनमंडल में 29 संवेदनशील कुओं को चिन्हित कर उन्हें सुरक्षित बनाया जा रहा है और इस अभियान की पूर्ण सफलता के लिए वन विभाग स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों तथा आम नागरिकों से भी सक्रिय सहयोग की अपील करता है, ताकि बस्तर के वन्यप्राणियों को एक सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही वन विभाग ने जागरूक नागरिकों से अनुरोध किया है कि यदि उनके क्षेत्र में कोई भी ऐसा खुला या असुरक्षित कुआं स्थित हो, तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन परिक्षेत्र कार्यालय को दें और वन्यजीव संरक्षण को अपना सामूहिक सामाजिक दायित्व समझकर बस्तर की अमूल्य जैव-विविधता को बचाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

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