रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित न्यायालय परिसर में फर्जी ऋण पुस्तिका और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों की जमानत कराने का बड़ा मामला सामने आया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गिरोह का पर्दाफाश किया और तीन महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़ी गई महिलाओं पर अदालत को गुमराह करने और जाली दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318, 338, 336, 340 और 238 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
न्यायालय परिसर से खुली फर्जीवाड़े की पोल
सेंट्रल जोन के डीसीपी तारकेश्वर पटेल को सूचना मिली थी कि कुछ लोग कोर्ट में फर्जी दस्तावेज जमा कर लगातार जमानत ले रहे हैं। उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सिविल लाइन पुलिस को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।
जब पुलिस टीम ने रायपुर न्यायालय परिसर में दबिश दी, तो तीन महिलाएं ऋण पुस्तिकाओं में कांट-छांट करते और संदिग्ध कागजात जमा करते हुए रंगे हाथों पकड़ी गईं। कड़ाई से पूछताछ करने पर उन्होंने कबूल किया कि वे फर्जी ऋण पुस्तिकाएं तैयार कर अलग-अलग अदालतों में आरोपियों की जमानत लिया करती थीं।
विभिन्न जिलों की रहने वाली हैं आरोपी महिलाएं
पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई तीनों महिलाएं राज्य के अलग-अलग जिलों से ताल्लुक रखती हैं:
सुनीता देवी राजपूत: ग्राम टेका हल्दी, थाना तिल्दा, जिला रायगढ़।
सरस्वती बाई सोनी: उरला काली मंदिर के पास, डीडी कॉलोनी, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग।
मीना बाई कोरम: ग्राम भेजराटोला मितानिन बाई, डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव।
न्यायिक प्रक्रिया से खिलवाड़ पर सख्त रुख
रायपुर पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद कड़ा संदेश जारी किया है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि अदालत या किसी भी शासकीय कार्यालय में जाली दस्तावेज प्रस्तुत कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे तत्वों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
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