यह मांग Consumer Product Safety Commission (CPSC) की ओर से की गई है। आमतौर पर यह एजेंसी बाजार में बिकने वाले असुरक्षित उपभोक्ता उत्पादों, जैसे घरेलू उपकरण, खिलौने और अन्य वस्तुओं से होने वाली चोटों की निगरानी करती है। लेकिन अब एजेंसी अपने दायरे का विस्तार करते हुए अस्पतालों से बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संबंधी डेटा एकत्र करना चाहती है।
मरीजों की पहचान सहित मांगी जा रही जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार, CPSC ने कई बड़े अस्पतालों से कहा है कि वे इमरजेंसी विभाग में इलाज कराने वाले सभी मरीजों का विस्तृत रिकॉर्ड साझा करें। इसमें मरीज का नाम, पता, बीमारी या चोट का विवरण, चिकित्सकीय निदान (Diagnosis) और अन्य व्यक्तिगत जानकारी शामिल हो सकती है।
यह डेटा Konza Health नामक एक निजी संस्था को विश्लेषण (Analysis) के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पतालों को भेजे गए ईमेल में इस प्रक्रिया को "अनिवार्य" (Mandatory) और "आवश्यक" (Required) बताया गया है।
अस्पतालों और विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
कई अस्पतालों के कानूनी सलाहकारों और स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों ने इस योजना पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि CPSC के पास इतनी व्यापक व्यक्तिगत स्वास्थ्य जानकारी एकत्र करने का स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि लाखों लोगों के संवेदनशील मेडिकल रिकॉर्ड किसी निजी संस्था को सौंपना मरीजों की गोपनीयता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
Case Western Reserve University की हेल्थ लॉ प्रोफेसर Sharona Hoffman ने कहा कि यदि किसी निजी कंपनी के पास इतने बड़े स्तर पर पहचान योग्य मेडिकल डेटा पहुंचता है, तो इससे मरीजों की निजता पर गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
100 अस्पतालों को जोड़ने की तैयारी
आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, CPSC इस वर्ष के अंत तक कम से कम 100 अस्पतालों को इस नई निगरानी प्रणाली से जोड़ना चाहती है, ताकि इमरजेंसी विभाग में आने वाले मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड नियमित रूप से प्राप्त किए जा सकें।
बताया गया है कि एजेंसी की योजना हर प्रकार की चोट या स्वास्थ्य समस्या से जुड़े रिकॉर्ड एकत्र करने की है। इनमें हड्डी टूटने, बच्चों में वैक्सीन के बाद होने वाली प्रतिक्रिया, दुर्घटनाएं और यहां तक कि आत्महत्या के प्रयास जैसे मामले भी शामिल हो सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन के दौरान शुरू हुई नई पहल
यह परियोजना ऐसे समय शुरू की गई है जब राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में संघीय एजेंसियों में कई बड़े प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल में CPSC के तीन डेमोक्रेटिक बोर्ड सदस्यों को हटाया गया और पिछले 16 महीनों में एजेंसी के लगभग 20 प्रतिशत अनुभवी कर्मचारी भी सेवा छोड़ चुके हैं।
इसी दौरान ट्रंप प्रशासन ने अन्य सरकारी विभागों के माध्यम से भी लाखों अमेरिकियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक अधिक पहुंच प्राप्त करने के प्रयास किए हैं।
कानून और निजता पर बढ़ा विवाद
अमेरिकी कानून के अनुसार, यदि कोई सरकारी एजेंसी 10 या उससे अधिक संस्थानों से इस प्रकार की जानकारी मांगती है, तो उसे पहले सार्वजनिक सूचना जारी करनी होती है और आम लोगों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित करनी होती हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि CPSC ने यह प्रक्रिया पूरी किए बिना ही अस्पतालों से संपर्क शुरू कर दिया। बाद में एजेंसी ने स्वीकार किया कि कानून के अनुसार आवश्यक सार्वजनिक सूचना अभी तक जारी नहीं की गई थी।
दूसरी ओर, कुछ अस्पतालों का कहना है कि यदि वे मरीजों का निजी डेटा साझा करते हैं, तो इससे संघीय गोपनीयता कानून (Federal Privacy Law) का उल्लंघन हो सकता है।
AI आधारित निगरानी प्रणाली का होगा इस्तेमाल
नई योजना में Artificial Intelligence (AI) की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
CPSC के कार्यवाहक अध्यक्ष Peter Feldman ने फरवरी में कहा था कि एजेंसी AI आधारित तकनीक की मदद से चोटों से जुड़े डेटा का अधिक प्रभावी विश्लेषण करना चाहती है।
इसके लिए Kansas स्थित Konza Health को पांच वर्षों का लगभग 15.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुबंध दिया गया है। यह संस्था देशभर के अस्पतालों से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (Electronic Health Records) का स्वतः विश्लेषण करेगी।
पहले क्या व्यवस्था थी?
अब तक अमेरिका में National Electronic Injury Surveillance System (NEISS) के माध्यम से कई अस्पताल स्वेच्छा से चोटों से संबंधित जानकारी साझा करते थे। इस प्रणाली में मरीजों की पहचान से जुड़ी जानकारी आमतौर पर हटा दी जाती थी और केवल उपभोक्ता उत्पादों से होने वाली चोटों का विश्लेषण किया जाता था।
नई प्रणाली इससे कहीं अधिक व्यापक है, क्योंकि इसमें मरीजों की पहचान योग्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य जानकारी भी शामिल करने का प्रस्ताव है।
बढ़ रही हैं गोपनीयता संबंधी चिंताएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को मौजूदा स्वरूप में लागू किया गया, तो यह अमेरिका में मरीजों की गोपनीयता से जुड़े सबसे बड़े विवादों में से एक बन सकता है।
फिलहाल कई अस्पताल इस प्रस्ताव की कानूनी समीक्षा कर रहे हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि सभी संस्थान इस योजना में शामिल होंगे या नहीं। वहीं, CPSC का कहना है कि नई प्रणाली से चोटों से संबंधित आंकड़ों की गुणवत्ता और उपयोगिता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भविष्य में असुरक्षित उत्पादों की पहचान और उपभोक्ताओं की सुरक्षा बेहतर ढंग से की जा सकेगी।
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