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सारंगढ़-बिलाईगढ़ , भाई-बहन के अटूट प्रेम को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित विभिन्न जिलों में  'बीज राखी ' बनाने का अनूठा अभियान चलाया जा रहा है। त्योहार के बाद मिट्टी में मिलने पर इन राखियों में जड़े देसी बीज अंकुरित होकर पौधे बन जाते हैं।  इन इको-फ्रेंडली राखियों में धान, सब्जियों और फूलों जैसे देसी बीज होते हैं। इन्हें फेंकने के बजाय अगर मिट्टी में डाल दिया जाए, तो ये हरियाली बिखेरते हैं। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व केवल रिश्तों की मिठास ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का एक नया अध्याय भी लिखेगा। कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के निर्देशन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की स्व-सहायता समूह की महिलाएं बड़े पैमाने पर पर्यावरण-अनुकूल राखियों के निर्माण में जुटी हैं। इस वर्ष बीज राखी थीम पर कुल 12 हजार 300 राखियां तैयार की जा रही हैं, जो भाई-बहन के पवित्र प्रेम के साथ-साथ समाज को हरियाली और पर्यावरण संवर्धन का सुंदर संदेश देंगी।

’माटी में रोपने पर पौधे बन मुस्कुराएगी राखी’
      इन राखियों का मुख्य आकर्षण इनके केंद्र (मध्य) में रखे गए बीज हैं। रक्षाबंधन पर्व के उपरांत इन राखियों को मिट्टी या गमलों में रोपित किया जा सकेगा, जिससे नए पौधे अंकुरित होंगे। महिलाओं का यह अभिनव प्रयास समाज में पर्यावरण-जागरूकता फैलाने के साथ-साथ प्रकृति को संवारने का कार्य भी करेगा।

’जिले के विभिन्न ग्रामों में बिहान की बहनें पूरे उत्साह के साथ राखी निर्माण में जुटी’

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के विभिन्न गांवों में बिहान दीदियों द्वारा राखियों का निर्माण पूरे उत्साह के साथ किया जा रहा है। इसमें सालर और गोड़म की दीदियाँ सबसे आगे रहते हुए 2-2 हजार राखियाँ बना रही हैं, वहीं छिंद, पेंड्रावन और सलोनीकला में 1,500-1,500 राखियों का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा ग्राम कोसीर, पवनी और बुंदेली में 1-1 हजार राखियाँ तैयार की जा रही हैं, जबकि बोन्दा में 500 और लेंद्रा में 300 राखियों के निर्माण के साथ इस हरित अभियान को आकार दिया जा रहा है।

’स्वावलंबन और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम’
     बिहान समूह की यह रचनात्मक पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रही है। रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व को सीधे प्रकृति से जोड़ने और बहनों के इस हरित नवाचार की पूरे जिले और राज्य में भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है। 

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