समीक्षा के दौरान पोषण ट्रैकर एप में नियमित एवं त्रुटिरहित डेटा प्रविष्टि, आंगनवाड़ी केंद्रों का सतत निरीक्षण, कुपोषित बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं की नियमित मॉनिटरिंग तथा शासन के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। परियोजना अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों का निरीक्षण करने, आवश्यक अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण सुनिश्चित करने तथा सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
बैठक में विभागीय योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार और ग्राम स्तर तक जनजागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, ताकि अधिकाधिक पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके। विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा, समयबद्ध प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तथा शासन द्वारा निर्धारित संकेतकों के अनुरूप कार्य निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 रहा। अधिकारियों एवं प्रतिभागियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं समग्र विकास पर इसके प्रतिकूल प्रभाव तथा इसकी रोकथाम में प्रशासन, पुलिस, विभिन्न विभागों और समुदाय की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बाल विवाह की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई, विभागों के मध्य समन्वय और समुदाय आधारित जन-जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना प्राप्त हो तो इसकी जानकारी तत्काल प्रशासन, पुलिस अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के अंत में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से टीम भावना के साथ कार्य करते हुए शासन की मंशा के अनुरूप महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का पारदर्शी, प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और जनहितकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया। विभागीय योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सूरजपुर जिले में महिला सशक्तिकरण, मातृ-शिशु कल्याण, पोषण सुधार तथा बाल संरक्षण के लक्ष्यों को गति देने पर विशेष बल दिया गया।
खबरें नहीं सच का प्रहार


No comments:
Post a Comment