वित्त मंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि विज्ञान विषय से स्नातक होने के बावजूद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (न्च्ैब्) की तैयारी के दौरान हिंदी साहित्य को वैकल्पिक विषय चुना था। इसी दौरान उन्हें कबीर साहेब के साहित्य और दर्शन का गहन अध्ययन करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि कबीर साहेब की वाणी ने उनके जीवन और सोच को गहराई से प्रभावित किया है।
श्री चौधरी ने कहा कि वे ईश्वर से सफलता नहीं, बल्कि ऐसा आशीर्वाद मांगते हैं कि जीवन में चाहे कितना भी ऊंचा स्थान मिले, कभी अहंकार न आए और कठिन परिस्थितियों में भी मन में निराशा न हो। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की सेवा ही उनके जीवन का उद्देश्य है तथा वे सदैव उसी भावना के साथ कार्य करते रहेंगे। उन्होंने भावुकता के साथ कहा कि जीवन के चुनौतीपूर्ण दौर में कबीर पंथ के इस पवित्र संस्थान ने उन्हें सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया था, जिसे वे कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि सच्चे संबंध वही होते हैं जो व्यक्ति के कठिन समय में भी साथ खड़े रहें। यही कबीर साहेब की शिक्षाओं का सार भी है। उन्होंने कहा कि कबीर पंथ समाज और राष्ट्र के नैतिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इस योगदान के प्रति सरकार सदैव सम्मान का भाव रखती है।
इस अवसर पर धर्माधिकारी, कबीर पंथ के संत-महात्मा, समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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