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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीड़ों या बीमारियों के कारण फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को व्यापक वित्तीय सहायता और सुरक्षा कवच प्रदान करना है। दक्षिण बस्तर का जैविक जिला दंतेवाड़ा खेती-किसानी के क्षेत्र में लगातार नई पहचान बना रहा है। यहां किसान जैविक और पारंपरिक खेती के साथ प्राकृतिक जोखिमों से बचाव के लिए भी जागरूक हो रहे हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर सामने आई है। 

7 हजार से अधिक किसानों को 14 करोड़ रुपये से अधिक की बीमा दावा राशि सीधे उनके बैंक खातों में
      खरीफ 2025 सीजन में   इसका सबसे बड़ा प्रमाण देखने को मिला, जब जिले के 7 हजार से अधिक किसानों को 14 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक की बीमा दावा राशि सीधे उनके बैंक खातों में मिली। यह राशि ऐसे समय किसानों के लिए बड़ी राहत बनी, जब मौसम की अनिश्चितता और प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को नुकसान पहुंचा था। समय पर मिली बीमा राशि से किसानों ने खेती का काम दोबारा शुरू किया और उनका योजना पर भरोसा और मजबूत हुआ।

प्राकृतिक आपदा में मिला आर्थिक सहारा
        दंतेवाड़ा के किसानों का कहना है कि पहले फसल खराब होने पर उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था। अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कारण उन्हें यह भरोसा है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सरकार उनके साथ खड़ी है। बीमा की राशि मिलने से खेती की लागत निकालने और अगली फसल की तैयारी करने में काफी मदद मिली।

11 प्रमुख खरीफ फसलें योजना में शामिल
       जिले की कृषि परिस्थितियों को देखते हुए इस वर्ष धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंगफली, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी और रागी सहित 11 प्रमुख खरीफ फसलों को योजना में शामिल किया गया है। इससे जिले के अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल सकेगा।

31 जुलाई तक कराएं फसल बीमा
     कृषि विभाग ने खरीफ 2026 सीजन के लिए किसानों से 31 जुलाई 2026 तक फसल बीमा कराने की अपील की है। मौसम विभाग ने इस वर्ष अल नीनो के आंशिक प्रभाव के कारण अनियमित वर्षा की संभावना जताई है। ऐसे में समय पर बीमा कराने से किसानों को संभावित नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

नुकसान होने पर 72 घंटे के भीतर दें सूचना
        कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि यदि प्राकृतिक आपदा, जलभराव या अन्य कारणों से फसल प्रभावित होती है तो 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देना जरूरी है। किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन 14447 पर जानकारी दे सकते हैं या कृषि विभाग, संबंधित बैंक, पटवारी अथवा बीमा कंपनी को सूचना देकर दावा प्रक्रिया शुरू करा सकते हैं।

सुरक्षित खेती की ओर बढ़ता दंतेवाड़ा

        जिला प्रशासन और कृषि विभाग का मानना है कि जैविक एवं आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा में खेती ही अधिकांश परिवारों की आजीविका का आधार है। ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा देने, उनकी आय को स्थिर रखने और खेती को अधिक सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यही कारण है कि जिले में बड़ी संख्या में किसान इस योजना से जुड़कर सुरक्षित खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। 

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