दानवीर सेठ किरोड़ीमल का नाम शिक्षा, समाजसेवा और जनहित के कार्यों में अग्रणी रहा है। उनके ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए ही इस तकनीकी संस्थान की स्थापना उनके नाम पर की गई थी। हालांकि, बीच में इसका नाम बदल दिया गया था, जिसके बाद से ही इसे पुराना नाम देने की मुहिम चल रही थी।
शासन का आधिकारिक आदेश:
28 जुलाई को जारी सरकारी आदेश के तहत संस्थान का पुराना नाम बहाल करने की स्वीकृति मिली। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग की सहमति भी शामिल है। आदेश जारी होते ही यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
अग्र समाज ने जताया आभार, ओपी चौधरी की कोशिशों को सराहा
नाम वापस बहाल होने के बाद अग्र समाज के प्रतिनिधियों और शहर के वरिष्ठ नागरिकों ने शासन के कदम की सराहना की। समाज के लोगों का कहना है कि यह फैसला न केवल जनभावनाओं का सम्मान है, बल्कि एक महान समाजसेवी की विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि भी है।
वित्त मंत्री की भूमिका: समाज ने रायगढ़ विधायक और प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि मंत्री चौधरी की पहल से यह मांग शासन स्तर पर पूरी हो सकी।
विरासत का सम्मान: प्रतिनिधियों का मानना है कि इस फैसले से युवाओं को सेठ किरोड़ीमल के त्याग और सामाजिक कार्यों से प्रेरणा मिलेगी।
पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत हैं सेठ किरोड़ीमल
सेठ किरोड़ीमल का योगदान किसी एक वर्ग या समाज तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने रायगढ़ और आसपास के इलाकों में शिक्षा तथा जन कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए।
संस्थान के नाम की पुनर्स्थापना से यह संदेश साफ गया है कि समाज के लिए दिए गए योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अब आने वाली नई पीढ़ियां भी इस संस्थान के माध्यम से उनकी सामाजिक सेवा की परंपरा से परिचित होती रहेंगी।
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