मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अकेले अगस्त महीने में भी बारिश की रफ्तार सुस्त ही बनी रहेगी।
खरीफ फसलों और खेती-किसानी पर पड़ेगा सीधा असर
अगस्त और सितंबर का समय भारतीय कृषि के लिए काफी मायने रखता है। यही वह दौर होता है जब खरीफ फसलें तेजी से बढ़ती हैं।
बारिश की कमी का सीधा प्रभाव इन चीजों पर पड़ सकता है:
मिट्टी की नमी: कम बारिश से खेतों में नमी का स्तर गिर सकता है।
जलस्तर: प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण प्रभावित होने का खतरा है।
फसलों की बढ़वार: धान, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों की पैदावार पर असर दिख सकता है।
जुलाई की भारी बारिश ने दिलाई थी राहत
मानसून की शुरुआत भले ही कमजोर रही हो, लेकिन जुलाई में हुई अच्छी बारिश ने स्थिति संभाल ली थी। इसके दम पर खरीफ फसलों की बुआई ने तेजी पकड़ी। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो 24 जुलाई तक किसानों ने कुल 7.87 करोड़ हेक्टेयर जमीन पर बुआई पूरी कर ली थी। हालांकि, पिछले साल इसी तारीख तक यह आंकड़ा 8.26 करोड़ हेक्टेयर था, लेकिन अब यह अंतर घटकर 5 फीसदी से भी कम रह गया है।
बारिश के आंकड़े: 30 जुलाई तक देश भर में 270.1 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य (271.9 मिमी) के बेहद करीब है। जून के अंत तक जो बारिश की कमी 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, वह जुलाई खत्म होते-होते घटकर महज 14 प्रतिशत पर आ गई।
कई राज्यों में अब भी सूखे जैसी स्थिति
भले ही राष्ट्रीय स्तर पर बारिश के आंकड़ों में सुधार दिखा हो, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर स्थिति एक जैसी नहीं है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल देश के 17 मौसम उपखंडों (Subdivisions) में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है।
मध्य भारत: जुलाई महीने में यहां सामान्य से 29 प्रतिशत ज्यादा पानी बरसा।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत: इस क्षेत्र में 30 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई।
दक्षिण भारत: दक्षिणी राज्यों में भी सामान्य से 28 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
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