जिले में अब तक 2,500 कंटूर ट्रेंच का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है, जिनके माध्यम से लगभग 40.08 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन एवं भू-गर्भ में अवशोषण सुनिश्चित हुआ है। इससे आसपास के क्षेत्रों में कुओं, बोरवेल और अन्य जल स्रोतों के जलस्तर में सुधार की संभावना बढ़ी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की उपलब्धता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
रिज टू वैली वाटरशेड अवधारणा के अनुरूप जिले में 10 कार्यों के अंतर्गत कुल 5,124 कंटूर ट्रेंच का निर्माण कराया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों से तेजी से बहने वाले वर्षा जल को छोटे-छोटे ट्रेंचों में रोककर भूमि के भीतर समाहित किया जाता है। इससे वर्षा जल का संरक्षण, मिट्टी का कटाव नियंत्रण, खेतों में लंबे समय तक नमी बनाए रखने तथा फसलों के लिए प्राकृतिक जल उपलब्ध कराने में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है।
यह अभियान जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। भू-जल स्तर में सुधार से गर्मी के मौसम में जल संकट कम होगा, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन संभव होगा। इसके साथ ही हरित आवरण बढ़ाने, कृषि उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाते हुए संचालित 'मोर गांव मोर पानी 2.0' भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित हो रहा है।
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