इस्तीफा वापस लें धर्मेंद्र प्रधान: गजेंद्र यादव
छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस पूरे मामले पर बयान जारी करते हुए धर्मेंद्र प्रधान से अपना फैसला बदलने की अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी आग्रह किया है कि वे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कतई स्वीकार न करें।
गजेंद्र यादव ने तर्क दिया कि सरकार ने परीक्षा में गड़बड़ी की जांच के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया है, जो छात्रों के हित में पर्याप्त कदम है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में जो बड़े सुधार और नवाचार हुए हैं, उनमें धर्मेंद्र प्रधान का अहम योगदान रहा है।
दीपक बैज का हमला: चौतरफा दबाव में हुआ इस्तीफा
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने इस कदम पर सरकार को आड़े हाथों लिया। बैज ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिकता के आधार पर पद नहीं छोड़ा है, बल्कि देश भर के छात्रों और आम जनता के भारी दबाव के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी साख बचाने के लिए यह बलि दे रही है। कांग्रेस नेता के अनुसार, सिर्फ इस्तीफा काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे विवाद पर पूरी सरकार को देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान ने पत्र में लिखा- 'मैंने पहले दिन से जिम्मेदारी ली'
अपने इस्तीफा पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने 4 दशकों से शिक्षा क्षेत्र में अपने योगदान का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितता सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया, मामले की जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा रद्द कर नई तिथियां घोषित कीं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 21 जून 2026 को 20 लाख से अधिक छात्रों की दोबारा परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित कराई गई और 16 जुलाई को परिणाम भी जारी कर दिए गए। प्रधान ने कहा कि उन्होंने इस कठिन परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा और हमेशा मेधावी छात्रों के साथ खड़े रहे। लेकिन परीक्षा प्रक्रिया के दौरान जिस तरह से जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधा डालने का प्रयास किया, उससे वे काफी व्यथित थे।
संसद में पेश होगा पेपर लीक संशोधन विधेयक
इस पूरे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने 'पेपर लीक संशोधन विधेयक' (Paper Leak Amendment Bill) को अपनी मंजूरी दे दी है। इस सख्त कानून को आने वाले सप्ताह में संसद के पटल पर रखे जाने की पूरी संभावना है।
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