Khabar Prahar Logo खबरें नहीं सच का प्रहार
>
LATEST
खबर प्रहार...
BREAKING खबर प्रहार को रिर्पोटिंग हेतु संवाददाता की आवश्यकता है। संपर्क करें........

Stay Connected Worldwide

Uncover the Truth

Post Page Advertisement [Top]

Advertisement
हाल ही में उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज किए जाने के बाद, अब देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की गतिविधियां पूरी तरह थम गई हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, वर्तमान में देश के अलग-अलग राज्यों में बारिश के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं और आगामी कुछ दिनों तक मौसम का यही मिजाज बने रहने का पूर्वानुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि कई हफ्तों के अनियमित मानसून के बाद, अब प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रहा अल नीनो (El Nino) भारतीय मौसम चक्र को प्रभावित करने लगा है।

अल नीनो की सक्रियता से बाधित हुई मानसूनी हवाएं

वैज्ञानिकों ने पहले ही यह आशंका जताई थी कि अल नीनो का प्रभाव भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ेगा, जिससे वर्षा के स्तर में भारी गिरावट आ सकती है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति धीरे-धीरे और मजबूत हो रही है। यही मुख्य कारण है कि देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की अनुकूल प्रणालियों (Weather Systems) का निर्माण बाधित हो रहा है और मानसूनी हवाओं की ताकत लगातार कमजोर पड़ती जा रही है।

कमजोर मानसून और शुष्क मौसम की दोहरी मार

जून के आखिरी और जुलाई के शुरुआती दिनों में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अच्छी मानसूनी बारिश हुई थी, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि देरी से आया मानसून अब सामान्य स्थिति में लौट रहा है। हालांकि, यह सिलसिला जल्द ही धीमा हो गया। मौसम विभाग के मुताबिक:

  • मध्य, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों में अगले तीन से चार दिनों तक बारिश की गतिविधियां बेहद सीमित या न के बराबर रहने की संभावना है।

  • देश के कई राज्यों में वर्तमान में औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की जा रही है।

  • आने वाले दिनों में भारी या झमाझम बारिश की कोई भी संभावना नजर नहीं आ रही है।

जलवायु परिवर्तन और अल नीनो का संयुक्त प्रभाव

मौसम विज्ञानियों का विश्लेषण है कि अल नीनो और वैश्विक जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभाव के कारण भारत का मानसूनी ढांचा अत्यधिक अनिश्चित और संवेदनशील हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप देश में कभी बेहद कम समय में अत्यधिक तीव्र बारिश (Cloudbursts/Heavy Rain) देखने को मिलती है, तो कभी लंबे समय तक सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। वर्तमान परिस्थितियों और बादलों के सीमित प्रभाव को देखते हुए वैज्ञानिक लगातार इस मौसम चक्र पर नजर बनाए हुए हैं।

कृषि और खरीफ फसलों पर संकट के बादल

भारत में कृषि क्षेत्र की मानसून पर अत्यधिक निर्भरता को देखते हुए, बारिश की यह कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। मानसून के आगमन में पहले ही देरी हो चुकी थी, और अब बारिश के इस लंबे अंतराल ने भारतीय किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है। समय पर पर्याप्त वर्षा न होने के कारण खरीफ फसलों की बुआई और उनके कुल उत्पादन पर सीधा विपरीत असर पड़ने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।

No comments:

Post a Comment

Bottom Ad [Post Page]

Advertisement